छत से गिरता प्लास्टर, लोहे के सरिया और भीगती किताबें; बड़ागांव के सरकारी स्कूल का हाल बेहाल
टीकमगढ़ में 235 सरकारी स्कूल भवन जर्जर हालत में। बड़ागांव के स्कूल में छत से गिरता मलबा, बारिश में छात्रों की पढ़ाई बाधित। जानें प्रशासन का क्या है जवाब।
टीकमगढ़। जिले के कई सरकारी स्कूलों की हालत बेहद खस्ताहाल हो चुकी है। बारिश शुरू होते ही इन जर्जर इमारतों में पढ़ाई करना जोखिम भरा हो गया है। ऐसा ही नजारा बड़ागांव के तहत आने वाली 'शासकीय माध्यमिक शाला भेला' में देखने को मिल रहा है, जहाँ करीब 200 विद्यार्थी अपनी जान जोखिम में डालकर शिक्षा प्राप्त करने को मजबूर हैं। स्कूल की छत से न केवल पानी रिसता है, बल्कि प्लास्टर और कंक्रीट का मलबा भी नीचे गिरता रहता है, जिससे बच्चों और शिक्षकों में हर पल दहशत बनी रहती है।
📚 सुरक्षा भगवान भरोसे: कॉपी-किताबें भीगने और चोटिल होने का डर
अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षा विभाग को बार-बार सूचित करने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। छात्रों ने बताया कि बारिश में कक्षाएं गीली हो जाती हैं और उनकी किताबें भीग जाती हैं। अभिभावक मंगल सिंह के अनुसार, पूर्व में छत का मलबा गिरने से एक बच्चा चोटिल भी हो चुका है। बिल्डिंग की छत से लोहे के सरिया बाहर निकल आए हैं, जो किसी बड़े हादसे का संकेत दे रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखे हैं, लेकिन रटा-रटाया जवाब मिलता है कि "बजट आते ही मरम्मत हो जाएगी।"
📉 वैकल्पिक व्यवस्था का अभाव, फंड का इंतजार
शिक्षक रामनिवास चौबे ने बताया कि सर्वे तो हो चुका है, लेकिन आज तक फंड नहीं मिला। विभाग द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन गांव में ऐसी कोई सुरक्षित जगह उपलब्ध नहीं है जहाँ कक्षाएं संचालित की जा सकें। मजबूरी में बच्चों को इसी जर्जर भवन में बैठाया जा रहा है, जिससे बरसात के दिनों में पढ़ाई का कार्य बाधित होना निश्चित है।
🏗️ विभाग का पक्ष: 235 स्कूल जर्जर, डिस्मेंटल करने की तैयारी
इस मामले में डीपीसी पुरुषोत्तम त्रिपाठी ने स्वीकार किया कि जिले में 235 स्कूल भवन जर्जर स्थिति में हैं। उन्होंने बताया कि जहाँ स्थिति अत्यंत खराब है, वहां वैकल्पिक सरकारी भवनों में विद्यालय संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने 70 जर्जर स्कूलों की रिपोर्ट पीडब्ल्यूडी (PWD) को भेजी है, ताकि उन्हें डिस्मेंटल (ध्वस्त) किया जा सके। पिछले सत्र में भी 21 स्कूलों को डिस्मेंटल करने की कार्रवाई की गई थी।
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