एमपी में अतिथि विद्वानों को मिलेगी सौगात; सीएम ने दिए लंबित मांगें पूरी करने के निर्देश, जानें क्या है नया प्लान
मध्य प्रदेश में अतिथि विद्वानों के लिए सीएम मोहन यादव की बड़ी पहल। नियमितीकरण के लिए बनेगी समिति, दूसरे राज्यों का मॉडल होगा लागू। पढ़ें पूरी खबर यहाँ।
भोपाल। मध्य प्रदेश के कॉलेजों में कार्यरत अतिथि विद्वानों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक सुखद घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि अतिथि विद्वानों के नियमितीकरण और उनकी अन्य लंबित मांगों के समाधान के लिए एक उच्च-स्तरीय कमेटी गठित की जाएगी। उन्होंने कहा कि देश के अन्य राज्यों में मौजूद अतिथि विद्वान मॉडल का अध्ययन किया जाएगा और जिस राज्य का मॉडल सबसे बेहतर होगा, मध्य प्रदेश उसे अपनाएगा। मुख्यमंत्री ने उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार को निर्देश दिए हैं कि वे अधिकारियों के साथ समन्वय कर इन मांगों को जल्द पूरा करें।
📋 सरकार की अतिथि विद्वानों के प्रति प्रतिबद्धता
भारतीय मजदूर संघ के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम ने बताया कि उनकी सरकार ने पहले ही अतिथि विद्वानों के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें 13 आकस्मिक (केजुअल) और 3 ऐच्छिक अवकाश, महिला अतिथि विद्वानों को प्रसूति अवकाश (मैटरनिटी लीव), और स्थान परिवर्तन की सुविधा शामिल है। साथ ही, असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में 25 प्रतिशत पद आरक्षित करते हुए 10 वर्ष की आयु सीमा में छूट का प्रावधान भी किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा, "अतिथि विद्वानों की मेहनत और भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। उनकी बेहतरी के लिए सरकार हर संभव प्रयास करेगी।"
📊 उच्च शिक्षा और स्कूल शिक्षा में सुधार पर जोर
मुख्यमंत्री ने उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा विभाग को आर्थिक रूप से प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने बताया कि जब वे शिक्षा मंत्री थे, तब से लेकर अब तक जीआर (Gross Enrollment Ratio) में काफी सुधार हुआ है। उन्होंने खुशी जाहिर की कि राज्य के स्कूलों में 'जीरो फीसदी ड्रॉप आउट' की दिशा में सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है। कार्यक्रम के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने भी भरोसा दिलाया कि तकनीकी शिक्षा विभाग में 11 महीने के वेतन की विसंगति को दूर किया जाएगा और दोनों विभागों के अतिथि विद्वानों के लिए एक समान व्यवस्था लागू की जाएगी।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)