मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामलों में बढ़ी चिंता; 43% आरोपित हो रहे बरी, जांच की गुणवत्ता पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामलों में 43% आरोपित बरी। लोकायुक्त संगठन के आंकड़ों ने उठाई जांच की गुणवत्ता पर उंगलियां। पढ़ें पूरी रिपोर्ट और कानूनी विश्लेषण।

Jul 13, 2026 - 09:51
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मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामलों में बढ़ी चिंता; 43% आरोपित हो रहे बरी, जांच की गुणवत्ता पर उठे सवाल

भोपाल। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही लड़ाई एक बार फिर सवालों के घेरे में है। लोकायुक्त संगठन के हालिया आंकड़े बताते हैं कि राज्य में आय से अधिक संपत्ति, रिश्वतखोरी और पद के दुरुपयोग जैसे गंभीर मामलों में बड़ी संख्या में आरोपित अदालतों से बरी हो रहे हैं। मई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, जिन मामलों में कोर्ट का फैसला आया, उनमें से लगभग 43 प्रतिशत मामलों में आरोपित दोषमुक्त पाए गए।

📊 2,917 को सजा, 2,173 हुए बरी

लोकायुक्त की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक कुल 5,090 मामलों में न्यायालयीन निर्णय सामने आए हैं। इनमें से 2,917 आरोपितों को सजा दिलाने में अभियोजन सफल रहा, जबकि 2,173 आरोपित साक्ष्यों के अभाव में बरी हो गए। वहीं, प्रदेश की विभिन्न अदालतों में अभी भी 1,130 से अधिक मामले विचाराधीन हैं। इतने बड़े स्तर पर बरी होने की दर ने जांच की प्रक्रिया और साक्ष्यों के संग्रहण पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

📈 पिछले दशक में दोषसिद्धि दर में उतार-चढ़ाव

आंकड़ों का विश्लेषण करें तो वर्ष 2015-16 के बाद स्थिति में सुधार दिखा है। पिछले एक दशक में अधिकांश वर्षों में दोषसिद्धि दर (Conviction Rate) 70 प्रतिशत से अधिक रही है। विशेषकर वर्ष 2023-24 में यह दर 80 प्रतिशत तक पहुंची थी, जो 2024-25 में घटकर 71 प्रतिशत रह गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इन आंकड़ों में उतार-चढ़ाव जांच एजेंसियों की तत्परता और कानूनी दांव-पेचों को दर्शाता है।

🔍 कमजोर विवेचना: बरी होने की सबसे बड़ी वजह

हाई कोर्ट के वरिष्ठ आपराधिक अधिवक्ता अजय गुप्ता के अनुसार, भ्रष्टाचार के मामलों में सबसे बड़ी चुनौती 'मजबूत विवेचना' की होती है। उन्होंने बताया कि कई बार जांच एजेंसियां साक्ष्यों को उस स्तर तक एकत्रित नहीं कर पातीं कि वे अदालत में टिक सकें। साक्ष्यों के गलत प्रस्तुतीकरण या तकनीकी कमियों के कारण आरोपितों को 'संदेह का लाभ' (Benefit of Doubt) मिल जाता है, जिससे अभियोजन पक्ष कमजोर पड़ जाता है। भ्रष्टाचार मिटाने के लिए अब जांच की गुणवत्ता और अभियोजन पक्ष की मजबूती पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

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