कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से गुहार, MP में ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द खरीदी का फंसा पेंच; जानें पूरा गणित

MP में ग्रीष्मकालीन मूंग खरीदी में देरी से किसान चिंतित हैं। मोहन सरकार की उम्मीदें केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और बकाया ₹75 हजार करोड़ के पैकेज पर टिकी हैं।

Jul 15, 2026 - 19:32
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कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से गुहार, MP में ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द खरीदी का फंसा पेंच; जानें पूरा गणित

भोपाल। मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग खरीदी को लेकर किसानों की चिंताएं और परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। राज्य सरकार ने संसाधनों की कमी और केंद्र सरकार से बकाया वित्तीय अनुदान राशि का हवाला देते हुए इस बार खरीदी व्यवस्था में आ रही देरी पर अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसी नाजुक स्थिति में अब प्रदेश की मोहन यादव सरकार की आखिरी उम्मीद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर जाकर टिक गई है। कृषि विशेषज्ञों और प्रशासनिक हलकों का मानना है कि यदि केंद्र सरकार की ओर से मध्य प्रदेश का बकाया करीब 75 हजार करोड़ रुपए का विशेष पैकेज जारी कर दिया जाता है, तो न केवल मूंग खरीदी की राह आसान होगी, बल्कि राज्य के किसानों से जुड़ी कई अन्य महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं को भी नई गति मिल सकेगी।

🚫 भावांतर योजना खारिज: 1 जुलाई से शुरू होनी थी खरीदी, संसाधनों की कमी का हवाला देकर राज्य सरकार ने खड़े किए हाथ

मध्य प्रदेश कृषि विकास विभाग के पूर्व घोषित दिशा-निर्देशों के अनुसार, विपणन वर्ष 2026-27 के लिए ग्रीष्मकालीन मूंग की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी 1 जुलाई से शुरू होकर 10 अगस्त 2026 तक संचालित की जानी है। हालांकि, तय समय सीमा बीतने के बाद भी धरातल पर सुचारू खरीदी शुरू नहीं हो पाई है। मध्य प्रदेश किसान संघ के प्रांताध्यक्ष सर्वज्ञ दीवान का कहना है कि "केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय पर मध्य प्रदेश का लगभग 75 हजार करोड़ रुपए का कृषि अनुदान बकाया है। इसी भारी वित्तीय कमी के कारण राज्य सरकार ने जमीनी स्तर पर संसाधनों के अभाव का हवाला देते हुए मूंग खरीदी की व्यवस्था शुरू करने में लाचारी दिखाई है।" उल्लेखनीय है कि इस संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र से 'भावांतर भुगतान योजना' लागू करने की मांग की थी, जिसे केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने खारिज कर दिया। इसके बाद से मोहन सरकार लगातार केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के संपर्क में है ताकि जल्द से जल्द राहत राशि जारी करवाई जा सके।

📉 एमएसपी की सीमा से भारी नुकसान: ₹8,768 समर्थन मूल्य तय, लेकिन केवल 25% फसल खरीदने के नियम से किसान बेहाल

किसान नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार की खरीद नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। किसान संघ के प्रांताध्यक्ष सर्वज्ञ दीवान के अनुसार, "केंद्र सरकार ने ग्रीष्मकालीन मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹8,768 प्रति क्विंटल तो घोषित कर दिया है, लेकिन विडंबना यह है कि सरकार कुल अनुमानित उत्पादन का केवल 25 प्रतिशत हिस्सा ही एमएसपी पर खरीदेगी। इसके कारण शेष 75 प्रतिशत उपज को किसानों को मजबूरन खुले बाजार (मंडियों) में औने-पौने दामों पर बेचना पड़ रहा है।" वर्तमान में खुले बाजार में मूंग का भाव महज ₹6,000 से ₹7,000 प्रति क्विंटल के आसपास ही मिल रहा है। इस दोषपूर्ण नीति के कारण किसानों को प्रति क्विंटल ₹2,000 से ₹3,000 तक का भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।

🚜 17 दिनों से अनिश्चितकालीन धरना: 3.56 लाख किसानों ने कराया है पंजीयन, समाधान न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी

खरीदी की मांग और एमएसपी की विसंगतियों को लेकर अखिल भारतीय किसान संघ के बैनर तले प्रदेश के किसान सड़कों पर उतर आए हैं। राज्य के दो प्रमुख उत्पादक जिलों में पिछले 17 दिनों से किसानों का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन और आंदोलन लगातार जारी है। किसान संगठनों का स्पष्ट कहना है कि उनकी बातचीत केंद्रीय स्तर पर भी चल रही है, लेकिन यदि शीघ्र ही कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो इस आंदोलन को पूरे प्रदेश में उग्र और व्यापक रूप दिया जाएगा। गौरतलब है कि इस बार प्रदेश में मूंग की सरकारी खरीदी के लिए 3.56 लाख किसानों ने अपना पंजीयन कराया है। सरकार ने राज्य के 36 जिलों में मूंग और 28 जिलों में उड़द खरीदी की व्यवस्था प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से करने का दावा किया है। अकेले जबलपुर जिले में ही किसानों के लिए 50 से अधिक केंद्र बनाए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर फंड न होने से ये केंद्र फिलहाल सुस्त पड़े हैं।

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