बड़वानी में मिर्च की फसल पर वायरस का भीषण कहर; बर्बादी की कगार पर पहुंचे बालकुआं के किसान
बड़वानी के बालकुआं में मिर्च की फसल पर वायरस के प्रकोप से किसान गहरे संकट में हैं। लाखों रुपये का कर्ज लेकर की गई खेती अब सूख रही है। पढ़ें पूरी खबर।
बड़वानी। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिला अंतर्गत आने वाले ग्राम बालकुआं सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इस साल मिर्च की नकदी फसल पर वायरस का बेहद गंभीर और विनाशकारी प्रकोप देखने को मिल रहा है. जिस नकदी फसल से क्षेत्र के किसानों को सालभर की आजीविका और लाखों रुपये की बंपर आय की उम्मीद थी, वही फसल अब उनके जीवन की सबसे बड़ी चिंता और आर्थिक संकट का कारण बन गई है. क्षेत्र के अनेक किसानों ने भारी-भरकम कर्ज उठाकर और अपनी संचित पूंजी लगाकर मिर्च की बुवाई की थी, लेकिन अब ये पौधे तेजी से सूख रहे हैं और पूरी फसल पूरी तरह नष्ट होने के कगार पर पहुंच चुकी है. किसानों का गंभीर आरोप है कि इस तबाही के पीछे केवल प्राकृतिक कारण नहीं हैं, बल्कि बाजार में बिकने वाले बीज और कीटनाशक दवाइयों की गुणवत्ता भी संदेह के घेरे में है.
💸 2. 8 एकड़ में बुवाई और 6 लाख की लागत: किसान हीरालाल बरफा ने बयां किया अपना दर्द
ग्राम बालकुआं के निवासी और पीड़ित किसान हीरालाल बरफा ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया, "मैंने इस वर्ष अपने 8 एकड़ के खेत में बड़े पैमाने पर मिर्च की फसल लगाई थी. नर्सरी तैयार करने, खाद, कीटनाशक दवा, सिंचाई और मजदूरी को मिलाकर अब तक मेरा करीब 6 लाख रुपये का खर्च आ चुका है. शुरुआत में फसल बेहद तंदुरुस्त और अच्छी दिख रही थी, जिससे मुझे उम्मीद थी कि इस बार कम से कम 20 से 25 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा होगा. बड़वानी की मिर्च की मांग राजस्थान के जोधपुर और महाराष्ट्र के बाजारों तक रहती है."
हीरालाल ने आगे बताया कि अचानक फसल में वायरस का प्रकोप शुरू हुआ, जिसने देखते ही देखते पूरे खेत को अपनी चपेट में ले लिया. वर्तमान में उनकी 40 से 50 प्रतिशत फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है. उन्होंने बताया कि इस खेती के लिए उन्होंने बैंक और साहूकारों से करीब 5 लाख रुपये का कर्ज लिया था. यदि प्रशासन ने तुरंत सर्वे कर मुआवजा नहीं दिया, तो अगली रबी फसल (चना) की बुवाई करना भी उनके लिए नामुमकिन हो जाएगा, जिसमें प्रति एकड़ 20 से 25 हजार रुपये का अतिरिक्त खर्च आता है.
🧪 3. लीज पर खेत लेकर फंसे गजानन राठौड़: '720 कंपनी' के बीज और महंगी दवाओं की गुणवत्ता पर उठाए सवाल
इसी गांव के एक अन्य पीड़ित किसान गजानन खेमा राठौड़ की कहानी और भी अधिक दर्दनाक है. उन्होंने बताया, "मैंने 10 एकड़ भूमि लीज (किराए) पर लेकर मिर्च की खेती शुरू की थी, जिसके एवज में मुझे खेत मालिक को ही ₹5,00,000 का भुगतान करना है. इसके अलावा बीज, खाद और दवाइयों पर अलग से लाखों रुपये फूंक दिए. मैंने नामी नर्सरी से बुकिंग करवाकर 720 कंपनी का बीज मंगवाकर लगाया था."
गजानन राठौड़ का आरोप है कि वायरस का लक्षण दिखाई देते ही उन्होंने बाजार में उपलब्ध कई बड़ी कंपनियों की महंगी दवाइयों और कीटनाशकों का लगातार छिड़काव किया, लेकिन फसल पर इसका रत्ती भर भी सकारात्मक असर नहीं हुआ. वर्तमान में उनकी 90 प्रतिशत फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है. उन्होंने मांग की है कि किसानों को ठगने वाले खराब बीज और अप्रभावी दवाइयां बेचने वाली कंपनियों के खिलाफ शासन स्तर पर निष्पक्ष और सख्त कानूनी जांच होनी चाहिए.
🦟 4. सफेद मक्खी और थ्रिप्स का हमला: जानें क्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञ और इसके बचाव के तरीके
कृषि वैज्ञानिकों और फसल विशेषज्ञों के अनुसार, मिर्च की फसल में लगने वाला यह जानलेवा वायरस मुख्य रूप से रस चूसने वाले कीटों, जैसे— सफेद मक्खी (व्हाइट फ्लाई) और थ्रिप्स के माध्यम से तेजी से एक पौधे से दूसरे पौधे में फैलता है.
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लक्षण: इस वायरस की चपेट में आते ही पौधों की पत्तियां ऊपर या नीचे की ओर मुड़कर सिकुड़ने लगती हैं (लीफ कर्ल), जिससे पौधों का विकास पूरी तरह थम जाता है और फूल-फल आना बंद हो जाते हैं.
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उपचार व बचाव: विशेषज्ञों का कहना है कि एक बार फसल में वायरस का संक्रमण व्यापक रूप से फैल जाने के बाद इसका कोई सीधा रासायनिक उपचार संभव नहीं होता. इसलिए केवल बचाव ही इसका एकमात्र उपाय है. इसके लिए किसानों को हमेशा प्रमाणित सरकारी एजेंसियों से स्वीकृत बीज का ही चयन करना चाहिए, नर्सरी को कवर्ड नेट में तैयार करना चाहिए, संक्रमित पौधों को शुरुआत में ही उखाड़कर नष्ट कर देना चाहिए और कृषि विभाग की सलाह पर ही कीटनाशकों का संतुलित छिड़काव करना चाहिए.
📋 5. किसानों ने सरकार से की ये 4 प्रमुख मांगें: तत्काल वैज्ञानिक सर्वे और मुआवजे की गुहार
बड़वानी जिले के बालकुआं और आसपास के प्रभावित गांवों के पीड़ित किसानों ने जिला कलेक्टर और कृषि विभाग के आला अधिकारियों से निम्नलिखित प्रमुख मांगें की हैं:
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त्वरित वैज्ञानिक सर्वे: राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम तुरंत खेतों पर जाकर नुकसान का वास्तविक आकलन करे.
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उचित मुआवजा वितरण: आर्थिक तबाही झेल रहे कर्जदार किसानों को फसल बीमा और राहत कोष से तत्काल वित्तीय सहायता दी जाए.
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गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच: बाजार में बेचे गए '720 बीज' और संबंधित कीटनाशक दवाइयों के नमूनों (Samples) की प्रयोगशाला में वैज्ञानिक जांच कराई जाए.
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दोषी कंपनियों पर कार्रवाई: जांच में घटिया स्तर के उत्पाद पाए जाने पर संबंधित कंपनियों के लाइसेंस निरस्त कर उन पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए.
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