महाकौशल में थमी बारिश से किसान परेशान, मौसम वैज्ञानिक डॉ. संत कुमार शर्मा ने दी बड़ी खुशखबरी

छिंदवाड़ा और जबलपुर संभाग में अल नीनो के कारण थमी बारिश से मक्के की फसल संकट में है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. संत कुमार शर्मा के अनुसार 21 जुलाई से राहत की उम्मीद है।

Jul 16, 2026 - 20:03
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महाकौशल में थमी बारिश से किसान परेशान, मौसम वैज्ञानिक डॉ. संत कुमार शर्मा ने दी बड़ी खुशखबरी

छिंदवाड़ा। वैश्विक मौसम परिदृश्य में आए बदलाव यानी अल नीनो (El Niño) का सीधा असर अब छिंदवाड़ा सहित जबलपुर (महाकौशल) संभाग के दूसरे जिलों में भी साफ देखने को मिल रहा है. मानसून सीजन के बीच मौसम की इस बेरुखी ने क्षेत्र के किसानों की धड़कनें बढ़ा दी हैं. पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से बारिश पूरी तरह से थमी हुई है, जिसके चलते खेतों में खड़ी खरीफ फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं. खेतों में दरारें पड़ने और चिलचिलाती धूप के कारण किसानों की चिंता दिन-ब-दिन गहरी होती जा रही है.

📅 2. मौसम वैज्ञानिक डॉ. संत कुमार शर्मा का पूर्वानुमान: 21 जुलाई से दोबारा सक्रिय होगा मानसून

राहत की बात यह है कि मौसम वैज्ञानिकों ने आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होने की संभावना जताई है, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.

मौसम वैज्ञानिक डॉ. संत कुमार शर्मा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया: "मौसम विभाग ने सीजन की शुरुआत में ही यह आशंका जताई थी कि अल नीनो या सुपर अल नीनो का प्रभाव जबलपुर संभाग सहित छिंदवाड़ा जिले में देखने को मिल सकता है. हालांकि, एक सुखद अपडेट यह है कि गुरुवार से ही संभाग के कुछ चुनिंदा इलाकों में हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई है. आगामी 21 जुलाई 2026 से मानसून की गतिविधियां एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय होंगी, जिसके बाद 25 जुलाई तक छिंदवाड़ा सहित आसपास के तमाम जिलों में एक समान और अच्छी बारिश दर्ज की जाएगी."

🌽 3. रुक-रुक कर हो रही बारिश से थमी मक्के की प्रोग्रेस: किसान आनंद पवार ने बयां किया दर्द

अस्थिर मौसम और कम बारिश के कारण फसलों की ग्रोथ पर बहुत बुरा असर पड़ा है, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका पैदा हो गई है.

क्षेत्र के बड़े किसान आनंद पवार ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया: "मैंने इस सीजन में अपनी करीब 40 एकड़ कृषि भूमि पर मक्के की फसल लगाई है. शुरुआत में बहुत कम बारिश हुई, जिसके चलते आधी से ज्यादा फसल खेतों में ही सूखकर बर्बाद हो गई थी. नुकसान की भरपाई के लिए हमने दोबारा खेतों में मक्के की बोनी की. लेकिन जैसे ही पौधे थोड़े बड़े हुए, बारिश अचानक फिर से गायब हो गई. इस तरह रुक-रुक कर और अनिश्चित अंतराल पर होने वाली बारिश से मक्के की प्रोग्रेस (बढ़त) पूरी तरह थम जाती है, जिससे अंततः फसल की पैदावार और गुणवत्ता पर बेहद विपरीत प्रभाव पड़ता है."

📈 4. छिंदवाड़ा में 4 लाख हेक्टेयर में मक्के की बुआई: दांव पर लगी है जिले की पूरी अर्थव्यवस्था

उल्लेखनीय है कि छिंदवाड़ा जिले को मध्य प्रदेश का 'कॉर्न सिटी' (Corn City) कहा जाता है, क्योंकि यहाँ के अधिकांश किसान मक्के की खेती पर ही निर्भर हैं. इस चालू वर्ष में जिले के लगभग 4 लाख हेक्टेयर रकबे में मक्के की फसल बोई गई है. छिंदवाड़ा की स्थानीय अर्थव्यवस्था का एक बहुत बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर कृषि और विशेषकर मक्के के व्यापार पर टिका हुआ है. यदि बारिश की कमी से मक्के का उत्पादन प्रभावित होता है, तो न केवल किसानों की आर्थिक कमर टूटेगी, बल्कि इसका सीधा असर स्थानीय व्यापारियों, कृषि श्रमिकों और पूरे बाजार पर पड़ेगा. यही वजह है कि बारिश न होना सिर्फ किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि हर वर्ग के लिए बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है.

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