दूषित पानी से मौतों के बाद एक्शन में प्रशासन, जल स्रोतों का बनेगा हेल्थ रिपोर्ट कार्ड और जियो टैगिंग
भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी 55 जिलों के एनवायरनमेंट प्लान में संशोधन किया है। इंदौर में वॉटर क्वालिटी मॉनिटरिंग सेल बनेगी।
इंदौर। भागीरथपुरा में पिछले दिनों दिसंबर-जनवरी के दौरान दूषित पानी पीने के कारण 35 लोगों की दर्दनाक मौत के बाद, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) ने जल स्रोतों की कड़ी निगरानी और उनके संरक्षण को लेकर एक बेहद बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। इस पूरी घटना की उच्चस्तरीय जांच में इसे दूषित पानी से फैलने वाली गंभीर महामारी का संकेत माना गया, जिसके मुख्य आधार पर राज्य के सभी 55 जिलों के 'डिस्ट्रिक्ट एनवायरनमेंट प्लान' (District Environment Plan) में आवश्यक संशोधन किए गए हैं।
💧 इंदौर में जल्द बनेगी वॉटर क्वालिटी मॉनिटरिंग सेल
इस नई और सख्त व्यवस्था के तहत अब इंदौर जिले में विशेष रूप से 'वॉटर क्वालिटी मॉनिटरिंग सेल' का गठन किया जाएगा। यह सेल जिले की सभी छोटी-बड़ी नदियों, नालों, तालाबों और अन्य पारंपरिक जल स्रोतों की नियमित रूप से निगरानी करेगी। इसके साथ ही, जिले के सभी जल स्रोतों का एक विस्तृत 'हेल्थ रिपोर्ट कार्ड' तैयार किया जाएगा और पारदर्शिता के लिए उनकी जियो टैगिंग (Geo-tagging) भी की जाएगी।
📋 9 प्रमुख बिंदुओं पर होगा जल संरक्षण का कार्य
जल स्रोतों को प्रदूषण मुक्त बनाने और उनके दीर्घकालिक संरक्षण के लिए कुल नौ प्रमुख बिंदुओं पर एक मजबूत कार्ययोजना तैयार की गई है। इस योजना के तहत सतही जल, भूजल और कुएं-बावड़ियों जैसे पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण के साथ-साथ गंदे व दूषित पानी के वैज्ञानिक उपचार (टीटमेंट) पर विशेष जोर दिया जाएगा। आने वाले 12 से 24 महीनों के भीतर इस महत्वाकांक्षी योजना को प्रदेश के अन्य सभी जिलों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
🔍 भागीरथपुरा जांच रिपोर्ट को बनाया गया मुख्य आधार
इंदौर के इस संशोधित पर्यावरण प्लान में मुख्य रूप से भागीरथपुरा हादसे की विशेष जांच समिति की रिपोर्ट को आधार बनाया गया है। इस जांच रिपोर्ट में इस पूरी दुर्घटना को एक बड़ा 'जल-जनित आउटब्रेक' (Water-borne outbreak) करार दिया गया था। जांच के दौरान पानी के नमूनों में खतरनाक 'ई. कोलाई' बैक्टीरिया सहित कई अन्य जहरीले व दूषित तत्व पाए गए थे। इसी के मद्देनजर अब सभी जिलों से यह जवाब तलब किया गया है कि वे अपने यहाँ जल स्रोतों में सीवरेज और गंदे पानी के मिश्रण को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठा रहे हैं।
⚙️ व्यवस्था में होंगे ये प्रमुख बदलाव
नई कार्यप्रणाली के तहत जिले की तमाम नदियों, तालाबों और अत्यधिक प्रदूषित हिस्सों की पहचान की जाएगी। पानी के स्रोतों की गुणवत्ता के आधार पर उनके हेल्थ रिपोर्ट कार्ड बनाए जाएंगे। यह पूरा कार्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) और नगर निगम जैसी संबंधित एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ करेंगी। इसके अलावा, कान्ह और सरस्वती नदी के कई संवेदनशील क्षेत्रों समेत दूषित पानी वाले सभी हॉट स्पॉट चिन्हित किए जाएंगे।
इन संवेदनशील स्थानों पर पहले से चल रही ऑनलाइन निगरानी के साथ-साथ सुधारात्मक कार्यों को भी अब और अधिक गति दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, जल स्रोतों को कचरे और अवैध अतिक्रमण से सुरक्षित रखने, सभी भूजल स्रोतों की जियो टैगिंग करने, रेनवाटर हार्वेस्टिंग और वॉटर रिचार्जिंग को बढ़ावा देने पर भी विशेष फोकस रहेगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 'ईवीएन अलर्ट ऐप' (EVN Alert App) और ऑनलाइन सिस्टम का उपयोग दूषित पानी से जुड़ी जनशिकायतों और उनके त्वरित निवारण के लिए किया जाएगा।
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