सतपुड़ा और मेलघाट टाइगर रिजर्व के बीच फोरलेन निर्माण मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई, एनएचएआई ने पेश की रिपोर्ट
बैतूल-भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग पर सतपुड़ा और मेलघाट टाइगर रिजर्व के बीच फोरलेन निर्माण के मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई है। एनएचएआई ने रिपोर्ट पेश की और एनटीसीए को तलब किया गया है।
जबलपुर : बैतूल-भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग पर सतपुड़ा और मेलघाट टाइगर रिजर्व के बीच से फोरलेन सड़क मार्ग निकाले जाने के संवेदनशील मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई संपन्न हुई है। जंगलों और वन्यजीव गलियारों के बीच से इस फोरलेन हाईवे के निर्माण कार्य को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई थी, जिस पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की मुख्य खंडपीठ जबलपुर में यह सुनवाई की गई।
🛑 बिना एनटीसीए अनुमति के हाईवे निर्माण को दी गई थी चुनौती
अमरावती (महाराष्ट्र) के निवासी अद्वैत क्योले की ओर से यह जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें बैतूल-भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-49 पर सतपुड़ा और मेलघाट टाइगर रिजर्व के बीच फोरलेन सड़क बनाए जाने के प्रस्ताव और निर्माण को चुनौती दी गई थी।
याचिका में मुख्य रूप से यह तर्क दिया गया था कि केसला, भौंरा और बरेठा के घने जंगलों के बीच से इस फोरलेन सड़क का निर्माण कार्य बिना 'राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण' (NTCA) की आवश्यक अनुमति के आगे बढ़ाया जा रहा है। याचिका में यह भी अंदेशा जताया गया था कि इस तरह बीच जंगल से हाईवे गुजरने के कारण न केवल वाहन चालकों की सुरक्षा खतरे में पड़ेगी, बल्कि यहाँ के दुर्लभ वन्यजीवों की जान को भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो जाएगा। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इससे पहले 1 अप्रैल 2022 को हुई सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सतपुड़ा और मेलघाट टाइगर रिजर्व के बीच चल रहे इस निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी।
⚖️ हाईकोर्ट ने एनएचएआई से मांगी थी विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट
इस मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के तत्कालीन एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि जब 19.5 किलोमीटर के घने जंगल वाले हिस्से में से 10.5 किलोमीटर का हिस्सा ऊपर से (एलिवेटेड कॉरिडोर के रूप में) ले जाने की वैज्ञानिक सिफारिश पहले ही की जा चुकी है, तो आखिर उस सिफारिश का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है?
कोर्ट ने सवाल उठाया था कि सड़क के दोनों किनारों पर केवल बैरिकेड्स लगा देने से टाइगर सड़क को पार कैसे कर पाएंगे? सड़क के नीचे से टाइगर के आने-जाने के लिए संकरा रास्ता बनाना पूरी तरह से अनुचित और अवैज्ञानिक है। बाघ (टाइगर) का प्राकृतिक स्वभाव होता है कि जब तक उसे सामने खुला जंगल दिखाई नहीं देगा, तब तक वह उस रास्ते को पार नहीं करेगा। यदि उनके लिए इस प्रकार का संकरा रास्ता बनाया जाएगा, तो वे कभी उसका उपयोग नहीं करेंगे। इसके अलावा, ऐसी स्थिति में टाइगर कभी भी मुख्य सड़क पर आ सकता है, जिससे वन्यजीवों के साथ-साथ आम नागरिकों की जान को भी भारी खतरा बना रहेगा। इन सभी महत्वपूर्ण टिप्पणियों के साथ युगलपीठ ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को अपनी विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के कड़े निर्देश दिए थे।
📋 एनएचएआई ने पेश की रिपोर्ट, एनटीसीए को किया गया तलब
माननीय हाईकोर्ट के इन सख्त आदेशों का पालन करते हुए मंगलवार को एनएचएआई की तरफ से कोर्ट में अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश कर दी गई। एनएचएआई द्वारा प्रस्तुत इस रिपोर्ट के अध्ययन के बाद, हाईकोर्ट ने अब 'नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी' (NTCA) को इस पूरे मामले पर अपनी आधिकारिक आपत्ति और पक्ष रखने के लिए तलब किया है। इस जनहित याचिका की पैरवी के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने अदालत में प्रभावी रूप से अपना पक्ष रखा।
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