क्या इंदौर की उपेक्षा कर रहे हैं CM मोहन यादव? कैलाश विजयवर्गीय के नाम से वायरल हुआ पत्र
इंदौर की कथित उपेक्षा पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की वायरल चिट्ठी से बीजेपी में हलचल। विजयवर्गीय ने पत्र को नकारा, दिग्विजय सिंह ने जताई सहानुभूति।
इंदौर। मध्य प्रदेश की राजनीति में इंदौर की कथित उपेक्षा और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की नाराजगी का मुद्दा गरमा गया है। एक स्थानीय अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर दावा किया गया था कि विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को चिट्ठी लिखकर इंदौर की अनदेखी पर असंतोष जताया है। हालांकि, कैलाश विजयवर्गीय ने इस कथित पत्र को सिरे से खारिज करते हुए मीडिया के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि पता नहीं अखबार वाले ऐसी बातें कहां से लिख देते हैं।
⚔️ पत्र में लगे ये गंभीर आरोप
वायरल पत्र में इंदौर की उपेक्षा के पांच प्रमुख बिंदुओं का जिक्र किया गया है:
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मास्टर प्लान: शहर के मास्टर प्लान को मंजूरी न देना।
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मेट्रोपॉलिटन रीजन: इंदौर के आर्थिक योगदान के बावजूद 'उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन' नाम रखना।
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SGSITS की अनदेखी: इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय के केंद्र के रूप में इंदौर को नजरअंदाज करना।
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औद्योगिक उपेक्षा: पीथमपुर की जगह विक्रम उद्योगपुरी (उज्जैन) को प्राथमिकता देना।
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एयरपोर्ट विस्तार: इंदौर एयरपोर्ट के लिए भूमि उपलब्ध न कराना।
🗣️ दिग्गजों की प्रतिक्रिया: दिग्विजय और कांग्रेस का तंज
इस विवाद के बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा, "माननीय कैलाश विजयवर्गीय जी, आपका दर्द मैं समझ रहा हूं। जो मोहन यादव कभी आपके पैर छूता था, वह अब आपके साथ ऐसा व्यवहार कर रहा है।" वहीं, कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने विजयवर्गीय की कथित चिट्ठी को 'साहसी कदम' बताते हुए उनकी तारीफ की है, जिससे बीजेपी खेमे में सियासत और तेज हो गई है।
📉 क्या वास्तव में सब ठीक नहीं?
विजयवर्गीय द्वारा पत्र नकारे जाने के बावजूद, राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा आम है कि वे इंदौर को लेकर अपनी नाराजगी पहले भी जता चुके हैं। पूर्व में कैबिनेट बैठकों से दूरी बनाना और अब इस तरह की चर्चाओं का सामने आना स्पष्ट करता है कि इंदौर के विकास और प्राथमिकता को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष के स्वर दब नहीं रहे हैं।
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