भोपाल गैस त्रासदी, 40 साल बाद यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा हटा, पीथमपुर में होगा निपटान

Jan 2, 2025 - 16:39
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भोपाल गैस त्रासदी, 40 साल बाद यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा हटा, पीथमपुर में होगा निपटान

इंदौर:- भोपाल गैस त्रासदी के 40 साल बाद यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री का 337 मीट्रिक टन जहरीला कचरा आखिरकार हटाया गया। बुधवार रात 9 बजे, इस कचरे से भरे 12 कंटेनर हाई सिक्योरिटी के बीच भोपाल से पीथमपुर के लिए रवाना किए गए। यह कदम हाईकोर्ट के निर्देश के बाद उठाया गया, जिसमें 6 जनवरी 2025 तक कचरे के निपटान का आदेश दिया गया था।

8 घंटे में पूरा हुआ सफर

भोपाल से पीथमपुर तक 250 किलोमीटर की यात्रा के दौरान कचरे से भरे कंटेनर ने 8 घंटे का समय लिया। यह कचरा गुरुवार सुबह 5 बजे धार जिले के पीथमपुर के आशापुरा गांव स्थित रामकी एनवायरो प्लांट पहुंचा। इस दौरान कोहरे और ट्रैफिक जाम के चलते सफर चुनौतीपूर्ण रहा। पुलिस और सुरक्षा बलों ने ग्रीन कॉरिडोर बनाते हुए कंटेनरों को सुरक्षित रूप से उनके गंतव्य तक पहुंचाया।

चार दिन चली पैकिंग प्रक्रिया

337 मीट्रिक टन कचरे की शिफ्टिंग प्रक्रिया रविवार को शुरू हुई। चार दिनों तक इसे खास एचडीपीई बैग में पैक किया गया। इस दौरान 50 से अधिक मजदूर पीपीई किट पहनकर काम में लगे रहे। फैक्ट्री परिसर में कचरा इकट्ठा करने के साथ ही वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए उपकरण लगाए गए।

कचरे को पांच प्रकार में भरा गया है 

1. फैक्ट्री परिसर में फैले कचरे के साथ जमा की गई।

2. कीटनाशक निर्माण में बचा हुआ कचरा।

3. कीटनाशक के बचा हुआ हिस्सा।

4. एमआईसी गैस के निर्माण में इस्तेमाल सामग्री।

5. सेमी-प्रोसेस्ड पेस्टिसाइड अधूरी निर्माण प्रक्रिया में बचा रसायन।

स्थानीय विरोध और सुरक्षा उपाय

पीथमपुर में जहरीले कचरे को जलाने का स्थानीय स्तर पर विरोध हो रहा है। क्षेत्र की कई समितियों और संगठनों ने 3 जनवरी को पीथमपुर बंद का आह्वान किया है। इंदौर के डॉक्टरों और स्थानीय नागरिकों ने इस कचरे को जलाने के फैसले को अदालत में चुनौती दी है।

गैस त्रासदी की भयावहता

1984 की भोपाल गैस त्रासदी में हजारों लोगों की मौत हुई थी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, गैस रिसाव से 24 घंटे में 3,787 लोगों ने जान गंवाई, जबकि 35 हजार से अधिक लोग अब तक जहरीली गैस के प्रभाव से मारे जा चुके हैं। यूनियन कार्बाइड परिसर से अब हटाए गए कचरे ने आसपास के 3 किलोमीटर के क्षेत्र में 42 बस्तियों के भूजल को प्रदूषित कर दिया है।

प्रक्रिया

रामकी एनवायरो प्लांट में इस कचरे को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के दिशा-निर्देशों के तहत जलाया जाएगा। इससे पहले 2015 में ट्रायल रन के दौरान हर घंटे 90 किलो कचरा जलाया गया था। उसी रिपोर्ट के आधार पर अब यह निपटान प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

भोपाल गैस त्रासदी के चार दशक बाद यह कदम त्रासदी के घावों को भरने की दिशा में एक छोटा, लेकिन महत्वपूर्ण प्रयास है।

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