दिल्ली NCR बना भारत का सबसे बड़ा खपत बाजार; मुंबई और बेंगलुरु भी पीछे, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

PRICE और टाटा संस की 'मेनी अर्बन इंडियाज' रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली NCR देश का सबसे बड़ा उपभोग बाजार है। भारत के शहरों की आर्थिक स्थिति और मिडिल क्लास के बढ़ते प्रभाव पर पूरी रिपोर्ट।

Jul 04, 2026 - 18:10
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दिल्ली NCR बना भारत का सबसे बड़ा खपत बाजार; मुंबई और बेंगलुरु भी पीछे, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

प्राइस (PRICE) और टाटा संस की नई रिपोर्ट 'मेनी अर्बन इंडियाज' ने भारतीय शहरों की आर्थिक तस्वीर को स्पष्ट कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली एनसीआर अब देश का सबसे बड़ा उपभोग बाजार बनकर उभरा है, जिसकी सालाना खपत लगभग 126 अरब डॉलर है। यह आंकड़ा मुंबई और बेंगलुरु की संयुक्त खपत के लगभग बराबर है। इसका मुख्य कारण यहाँ रहने वाले परिवारों की अधिक संख्या है—दिल्ली एनसीआर में 75 लाख परिवार रहते हैं, जबकि मुंबई में यह संख्या 46 लाख है। परिवहन पर दिल्ली का सालाना 33 अरब डॉलर का खर्च पुणे और अहमदाबाद जैसे शहरों के पूरे बाजार के आकार से भी ज्यादा है।

🏙️ देश की तिहाई दौलत, महज 100 शहरों के पास

रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि भारत की कुल आबादी का 20 फीसदी से भी कम हिस्सा देश के शीर्ष 100 शहरों में बसता है, लेकिन ये शहर देश की कुल आय का एक-तिहाई हिस्सा पैदा करते हैं। विकास के आधार पर शहरों का वर्गीकरण किया गया है:

  • 'बिग सिक्स' (1 करोड़+ आबादी): औसत सालाना आय 23 लाख रुपये।

  • 'बूमटाउन' (25 लाख से 1 करोड़ आबादी): औसत सालाना आय 17 लाख रुपये।

  • 'ब्रेकआउट' (15 से 25 लाख आबादी): औसत सालाना आय 14 लाख रुपये।

  • 'फ्रंटियर' (5 से 15 लाख आबादी): औसत सालाना आय 12 लाख रुपये।

📊 मिडिल क्लास का लगातार बढ़ता दायरा

भारतीय अर्थव्यवस्था में मध्यम वर्ग की भागीदारी तेजी से मजबूत हो रही है। 6 लाख से 36 लाख रुपये सालाना कमाने वाले परिवारों की हिस्सेदारी पिछले एक दशक में 29 फीसदी से बढ़कर 53 फीसदी हो गई है, जिसके 2030 तक 60 फीसदी तक पहुँचने का अनुमान है। इस वृद्धि में हैदराबाद सबसे आगे है। वहीं, हाई-इनकम परिवारों (36 लाख रुपये से अधिक) की संख्या भी 3 फीसदी से बढ़कर 12 फीसदी हो गई है।

🚀 भविष्य की आर्थिक संभावनाएं

रिपोर्ट का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि 1.5 लाख रुपये से कम आय वाले परिवारों की संख्या में भारी कमी आ रही है। अनुमान है कि 2030 तक बड़े शहरों में ऐसे परिवारों का हिस्सा केवल 0.3 फीसदी रह जाएगा। यह आर्थिक बदलाव रियल एस्टेट, रिटेल, ऑटोमोबाइल और फाइनेंशियल सेवाओं जैसे हर सेक्टर के लिए एक बड़े बाजार के द्वार खोल रहा है, जिससे आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था को और गति मिलेगी।

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