महाभारत की ओजस्वी कथावाचिका तीजन बाई का देहावसान; जानें कैसा रहा उनका संघर्षपूर्ण सफर

पद्मविभूषण लोकगायिका तीजन बाई का निधन। पंडवानी शैली को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली तीजन बाई की यादों में कला जगत। पढ़ें उनका जीवन संघर्ष।

Jul 06, 2026 - 09:57
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महाभारत की ओजस्वी कथावाचिका तीजन बाई का देहावसान; जानें कैसा रहा उनका संघर्षपूर्ण सफर

जबलपुर। पंडवानी गायन शैली को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फलक पर नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाली प्रख्यात लोकगायिका पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई अब हमारे बीच नहीं रहीं। उनके निधन से कला और साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मीं तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज, अद्वितीय अभिनय क्षमता और कथा-वाचन की अद्भुत शैली से महाभारत को जन-जन तक पहुँचाया। उनकी सादगी और संघर्षों से भरी जीवन यात्रा लाखों कलाकारों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

🏛️ जबलपुर से था गहरा नाता

जबलपुर शहर से उनका विशेष जुड़ाव रहा था। वर्ष 2012 में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय ने अपने दीक्षा समारोह में उन्हें मानद 'डॉक्टर ऑफ लिटरेचर' (डी.लिट्.) की उपाधि से सम्मानित किया था। इससे पहले वर्ष 1988 में आकाशवाणी जबलपुर के आमंत्रण पर वे पहली बार शहर आई थीं, जहाँ उन्होंने अपनी प्रस्तुतियों से स्थानीय श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया था। शहीद स्मारक में आयोजित गोंडवाना महोत्सव में भी उन्होंने अपनी ओजस्वी शैली में महाभारत की कथाएं सुनाकर दर्शकों को भावविभोर कर दिया था।

🌟 संघर्षों से शिखर तक का सफर

तीजन बाई की सफलता का मार्ग कांटों भरा रहा। उन्होंने साझा किया था कि कैसे एक समय ऐसा भी था जब वे महज 10-11 रुपये के लिए रातभर गाना गाती थीं, ताकि एक वक्त का भोजन मिल सके। सामाजिक चुनौतियों और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने पंडवानी को अपना जीवन बनाया। उनके इसी समर्पण को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा था। उनका जाना भारतीय लोक परंपरा के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत है, लेकिन उनकी कला की गूँज पीढ़ियों तक सुनाई देती रहेगी।

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