मानदेय मामले में राज्य सरकार को झटका; कोर्ट ने कहा- केंद्र के बढ़े अंशदान का लाभ कर्मचारियों को ही मिले
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पक्ष में बड़ा फैसला। मानदेय में कटौती को गलत मानते हुए कोर्ट ने एरियर भुगतान के आदेश दिए।
जबलपुर। मध्य प्रदेश की हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को हाईकोर्ट से एक बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट की युगलपीठ ने मानदेय में कटौती के राज्य सरकार के फैसले को अनुचित करार दिया है। जस्टिस आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार द्वारा बढ़ाए गए अंशदान का लाभ सीधा आंगनबाड़ी कर्मियों को मिलना चाहिए था, न कि राज्य सरकार को अपने हिस्से में कटौती कर उसे समायोजित करना चाहिए था।
🔄 युगलपीठ का फैसला: एरियर मिलेगा, पर ब्याज नहीं
पूर्व में हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 3 फरवरी 2026 को सरकार को 27 जून 2019 से पहले की व्यवस्था बहाल करने और एरियर के साथ ब्याज देने का निर्देश दिया था। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा दायर अपील पर सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने मानदेय बहाली और एरियर भुगतान के आदेश को तो बरकरार रखा, लेकिन ब्याज संबंधी निर्देश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने माना कि मूल याचिका में ब्याज भुगतान का कोई पर्याप्त कानूनी आधार नहीं था।
📋 सरकार को निर्देश: पुरानी व्यवस्था बहाल और ग्रेच्युटी का लाभ
हाईकोर्ट ने राज्य शासन को निर्देशित किया है कि वे अपने पूर्व अंशदान की व्यवस्था को बनाए रखें। इसके अतिरिक्त, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि पात्र आंगनबाड़ी कर्मियों को ग्रेच्युटी का लाभ भी प्रदान किया जाना चाहिए। 'मध्य प्रदेश बुलंद आवाज नारी शक्ति आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका संगठन' की याचिका पर आए इस फैसले से सरकार को ब्याज के वित्तीय बोझ से तो राहत मिली है, लेकिन हजारों कार्यकर्ताओं को उनका बकाया एरियर मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
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