क्या गिरेगा चार मंजिला जर्जर भवन? नगर निगम की मशीनों के सामने खड़ी है बड़ी चुनौती
जबलपुर के बड़ा फुहारा में जर्जर भवन के शेष हिस्से को गिराना नगर निगम के लिए बनी चुनौती। सुरक्षा के चलते आसपास की चार इमारतें सील, व्यापार प्रभावित।
जबलपुर। शहर के सबसे व्यस्त और सघन व्यावसायिक क्षेत्र 'बड़ा फुहारा' में मंगलवार को गिरे चार मंजिला भवन का शेष हिस्सा अब भी नगर निगम प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। पिछले तीन दिनों से नगर निगम का अमला अलग-अलग प्लानिंग और अत्याधुनिक मशीनों के जरिए इसे गिराने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अब तक उन्हें पूर्ण सफलता नहीं मिली है।
⚠️ क्यों है भवन को गिराना इतना मुश्किल?
नगर निगम के सामने सबसे बड़ी दुविधा भवन की भौगोलिक स्थिति है। यदि भवन सीधे गिरता है, तो भारी जन-धन हानि का खतरा है। वहीं, यदि भवन दाएँ या बाएँ गिरता है, तो आसपास की सघन आवासीय और व्यावसायिक इमारतें क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। यही कारण है कि निगम का अमला बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है।
🛠️ तकनीक और श्रम, दोनों का इस्तेमाल
गुरुवार को नगर निगम के अतिक्रमण निरोधक अमले ने इंजीनियरों की देखरेख में जर्जर भवन को गिराने का प्रयास किया। इसके लिए जर्मनी से मंगाए गए 'टर्न टेबल लैडर' वाहन और स्टील वायर का उपयोग किया गया। जब तकनीक काम नहीं आई, तो कर्मचारियों ने हथौड़े और सब्बल की मदद से मैनुअल तुड़ाई की, लेकिन शेष जर्जर हिस्सा अभी भी खड़ा है। महापौर जगत बहादुर सिंह 'अन्नू' ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए।
🏢 जांच में सामने आई बड़ी वजह
अधिकारियों के अनुसार, भवन का सामने का हिस्सा तो मंगलवार को ही भरभराकर गिर गया था, लेकिन पीछे का हिस्सा अभी भी टिका हुआ है। जांच में पता चला है कि भवन के पिछले हिस्से में हाल ही में कुछ नए निर्माण (पुनर्निर्माण) कराए गए थे, जो उसे मजबूती दे रहे हैं। बरसात का मौसम होने के कारण यह हिस्सा कभी भी गिर सकता है, इसलिए इसे 'डिस्मेंटल' करना अनिवार्य है।
📉 प्रभावित व्यापारियों की बढ़ी परेशानी
नगर निगम ने सुरक्षा के मद्देनजर आसपास की चार इमारतों को खाली कराकर सील कर दिया है। इससे वहां के व्यापारियों का काम पूरी तरह ठप हो गया है। प्रभावित दुकानदारों का कहना है कि सोसायटी साड़ी वाले इस भवन के गिरने से न केवल उनकी इमारतों को नुकसान पहुंचा है, बल्कि मलबे के रूप में डाली गई मिट्टी से उनकी दुकानें भी पूरी तरह ढक गई हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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