खंडवा: सुलगांव में विद्युत टावर लगाने को लेकर बवाल, मुआवजे पर बनी सहमति के बाद किसानों का धरना समाप्त

खंडवा के सुलगांव में टावर लगाने को लेकर किसानों का बड़ा आंदोलन। कंपनी ने 30 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की। किसानों पर दर्ज एफआईआर निरस्त कराने का भी आश्वासन।

Jun 14, 2026 - 13:23
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खंडवा: सुलगांव में विद्युत टावर लगाने को लेकर बवाल, मुआवजे पर बनी सहमति के बाद किसानों का धरना समाप्त

खंडवा। पुनासा क्षेत्र के ग्राम सुलगांव में उच्चदाब विद्युत लाइन के टावर लगाने का मामला शनिवार को उग्र हो गया। शुक्रवार को पुलिस बल की तैनाती और प्रशासन के दबाव के बाद भी किसान पीछे नहीं हटे। शनिवार सुबह देवास, बड़वानी, खरगोन और कुक्षी सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में किसान सुलगांव पहुंचे और टेंट लगाकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। आक्रोशित किसानों ने बैरिकेड्स लगाकर पुनासा-सनावद मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया था।

💰 30 लाख रुपये का मुआवजा, खत्म हुआ गतिरोध

मामले की गंभीरता को देखते हुए मांधाता विधायक नारायण पटेल और भाजपा जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह तोमर ने हस्तक्षेप किया। किसान प्रतिनिधिमंडल के साथ कलेक्टर कार्यालय में पावर ग्रिड कंपनी के अधिकारियों की लंबी चर्चा हुई। अंततः कंपनी ने किसान तुलसाबाई की तीन एकड़ भूमि में सात टावर लगाने के एवज में 30 लाख रुपये का मुआवजा देने पर सहमति जताई, जिसके बाद आंदोलन समाप्त हुआ।

👮 एफआईआर निरस्त करने की मांग

आंदोलन के दौरान धनगांव पुलिस ने कंपनी की शिकायत पर नौ किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। विधायक और भाजपा जिलाध्यक्ष के सामने किसानों ने इन मुकदमों को निरस्त करने की मांग रखी। जनप्रतिनिधियों ने आश्वासन दिया है कि किसानों पर दर्ज इन प्रकरणों को जल्द ही निरस्त कराया जाएगा।

🔥 तीखी बहस और गहमागहमी का माहौल

आंदोलन स्थल पर उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब कुछ महिला अधिकारियों ने महिला किसानों के वीडियो बनाने शुरू किए। इससे नाराज महिला किसानों और अधिकारियों के बीच तीखी बहस हो गई और मोबाइल छीनने को लेकर धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। इसके अलावा, किसानों ने मूंदी एसडीओपी मनोहरसिंह गवली पर शुक्रवार को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ अभद्रता करने का आरोप भी लगाया है।

⚖️ समाधान की राह

विधायक और जिलाध्यक्ष के प्रयासों से अंततः प्रशासन और किसानों के बीच बीच का रास्ता निकल आया है। क्षेत्र में स्थिति फिलहाल सामान्य है, लेकिन प्रशासन के सामने अब किसानों पर दर्ज एफआईआर को निरस्त करने का वादा पूरा करने की चुनौती है।

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