नियमों को ताक पर रखकर महाधिवक्ता कार्यालय में नियुक्तियां? हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर AG को बुलाया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महाधिवक्ता कार्यालय (AG Office) में 157 सरकारी वकीलों की नियुक्तियों को चुनौती देने वाली याचिका पर सरकार से पूरा रिकॉर्ड तलब किया है।
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के महाधिवक्ता कार्यालय (एजी ऑफिस) में शासकीय अधिवक्ताओं की कथित रूप से नियम विरुद्ध की गई नियुक्तियों के मामले में मंगलवार को अत्यंत महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। नियुक्तियों को सीधे चुनौती देने वाली इस जनहित याचिका (PIL) पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया एवं जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने गंभीरता से सुनवाई की और राज्य सरकार को कड़े निर्देश जारी किए हैं। इस मामले में कुल 157 लॉ ऑफिसर्स (सरकारी वकीलों) की नियुक्ति को कटघरे में खड़ा किया गया है।
📑 10 वर्ष की प्रैक्टिस अनिवार्य: याचिका में पारदर्शिता न बरतने और अनुभवहीन अधिवक्ताओं को रखने के गंभीर आरोप
यह जनहित याचिका हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जबलपुर के संयुक्त सचिव योगेश सोनी की ओर से दायर की गई थी। याचिका में महाधिवक्ता कार्यालय में हाल ही में की गई शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्तियों की वैधता को चुनौती देते हुए कहा गया है कि इस पूरी प्रक्रिया में निर्धारित वैधानिक नियमों की घोर अनदेखी की गई है। आरोप लगाया गया है कि जानबूझकर अर्हता विहीन (अयोग्य) अधिवक्ताओं को भी राजनीतिक या अन्य रसूख के चलते नियुक्त कर दिया गया और पूरी नियुक्ति प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की पारदर्शिता नहीं बरती गई है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2013 में जारी आधिकारिक राजपत्र (Gazette) अधिसूचना के अनुसार, शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति के लिए उच्च न्यायालय में कम से कम 10 वर्ष की निरंतर वकालत (प्रैक्टिस) का अनुभव होना अनिवार्य किया गया है। इसके विपरीत, वर्तमान सूची में शामिल कई अधिवक्ताओं के पास यह निर्धारित न्यूनतम अनुभव भी उपलब्ध नहीं है। याचिका में इस पूरी चयन प्रक्रिया को मनमाना, पक्षपातपूर्ण और शासकीय अधिसूचना के प्रावधानों के विपरीत बताया गया है।
🏛️ हाईकोर्ट ने तलब किया पूरा रिकॉर्ड: 10 अगस्त को होगी अगली सुनवाई, महाधिवक्ता को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश
इस जनहित याचिका पर प्राथमिक दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की युगलपीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए महाधिवक्ता कार्यालय में हुए इन सभी शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति से जुड़े मूल प्रशासनिक रिकॉर्ड को अदालत के समक्ष पेश करने के साफ आदेश जारी किए हैं। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से इन दस्तावेजों और रिकॉर्ड को पेश करने के लिए कुछ समय प्रदान करने का विनम्र आग्रह किया गया था, जिसे युगलपीठ ने स्वीकार कर लिया। उच्च न्यायालय ने अब इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई आगामी 10 अगस्त को निर्धारित की है। कोर्ट ने साफ निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता (Advocate General) स्वयं अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहें ताकि स्थिति स्पष्ट की जा सके। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पैरवी की।
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