दतिया की सभा में क्यों रो पड़े नरोत्तम मिश्रा? आंसू छलकने की 'इनसाइड स्टोरी' पर पूर्व गृहमंत्री का बड़ा खुलासा
दतिया में भाषण के दौरान भावुक हुए पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने आंसुओं की इनसाइड स्टोरी, उपचुनाव में टिकट कटने और अपने राजनीतिक भविष्य पर खुलकर बात की है।
दतिया। पिछले 48 घंटों से मीडिया और सोशल मीडिया पर मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा के आंसू सबसे बड़ी खबर बने हुए हैं। दतिया की एक जनसभा में भाषण देते समय अचानक उनका गला भर आया और वे अपने आंसुओं को संभालते हुए बिना भाषण पूरा किए अपनी कुर्सी पर लौट गए। इस संवेदनशील घटना के बाद जब राजनीतिक गलियारों में इन आंसुओं की 'इनसाइड स्टोरी' तलाशी जाने लगी, तो खुद नरोत्तम मिश्रा ने इस पर खुलकर बात की। उन्होंने स्पष्ट किया, "मुझे कोई अफसोस या मलाल बिल्कुल नहीं है। पार्टी ने मुझे मेरी हैसियत से हमेशा ज्यादा ही दिया है। मैं 30 साल तक विधायक रहा और 15 साल तक मंत्री बनकर जनता की सेवा की। लेकिन हां, दतिया की जनता के लिए मेरे मन में सदैव गहरा सम्मान और भावुकता रही है। सिर झुकेगा तो केवल दतिया के बुजुर्गों, हमारे हमउम्र साथियों और दतिया में विराजीं पीतांबरा माई के सामने। वह जो क्षण आया था, वह दतिया के छूट जाने का दुख नहीं, बल्कि दतिया की माटी को सजदा करने और माथा टेकने का एक भावुक पल था।"
🌹 'भंवरे ने खिलाया फूल...': दतिया टिकट पर बोले नरोत्तम— हमारी सोच संकुचित हो सकती है, पार्टी दूर की सोचती है
दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधायकी जाने के बाद से ही नरोत्तम मिश्रा ने यहां होने वाले उपचुनाव की उम्मीद में अपनी राजनीतिक जमीन को दोबारा सींचना शुरू कर दिया था। हालांकि, पार्टी ने इस बार उन्हें टिकट न देकर आशुतोष तिवारी को अपना उम्मीदवार बनाया है। इस पर जब उनसे पूछा गया कि 'भंवरे ने खिलाया फूल, फूल को ले गया राजकुंवर' वाली कहावत उन पर सटीक बैठती है, तो नरोत्तम मिश्रा ने चिरपरिचित अंदाज में मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "जब हम केवल अपने व्यक्तिगत स्वार्थ तक सीमित रहकर सोचते हैं, तब मन में ऐसे विचार आते हैं। लेकिन मेरा दृढ़ विश्वास है कि संगठन हमेशा सर्वोपरि होता है। पार्टी ने जो भी निर्णय लिया है, वह बहुत सोच-समझकर और बेहतर भविष्य को ध्यान में रखकर ही लिया होगा। हमारी सोच संकुचित हो सकती है कि हमें ही टिकट मिले या हम ही मंत्री बनें, लेकिन पार्टी बहुत दूर की सोचती है और सभी कार्यकर्ताओं को समायोजित करके आगे बढ़ती है।"
🔄 राजनीतिक करियर का पहला टर्निंग पॉइंट: 6 बार के विधायक और नंबर टू की हैसियत से सीधे धरातल पर आने का सफर
भारतीय राजनीति में उतार-चढ़ाव तो आम हैं, लेकिन नरोत्तम मिश्रा की सियासत का ग्राफ हमेशा सीढ़ियां चढ़ता रहा। वे मध्य प्रदेश भाजपा में 6 बार के विधायक, 5 बार के कैबिनेट मंत्री और शिवराज सरकार के दौरान अघोषित रूप से नंबर टू की हैसियत में रहे। एक समय ऐसा भी आया था जब राष्ट्रीय मीडिया में उनका नाम मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल किया जाने लगा था। सिनेमा से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर उनके बयानों ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई थी। लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव में मिली अप्रत्याशित हार के बाद उनकी सियासत ने एकदम से करवट ले ली। अपने इस नए सियासी दौर को स्वीकार करते हुए उन्होंने बेबाकी से कहा, "मेरे पूरे राजनीतिक जीवन में ऐसा टर्निंग पॉइंट पहले कभी नहीं आया था। यह मेरी जिंदगी का पहला और सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट है, लेकिन राजनीति में उतार-चढ़ाव सबके जीवन में आते हैं और यह बेहद सामान्य प्रक्रिया है।"
🗳️ दतिया उपचुनाव में अग्निपरीक्षा: आशुतोष तिवारी को जिताने के लिए मैदान में उतरे नरोत्तम; सर्वे की अफवाहों को नकारा
वर्तमान में डॉ. नरोत्तम मिश्रा पर दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को भारी मतों से विजयी बनाने की बड़ी जिम्मेदारी है। अपने भोपाल स्थित सरकारी बंगले पर पहुंचे समर्थकों को बार-बार दिशा-निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि वे 16 जुलाई से लगातार दतिया में रहेंगे और सीधे 30 जुलाई को ही वहां से वापस लौटेंगे। जब उनसे पूछा गया कि विपक्ष द्वारा यह प्रचारित किया जा रहा है कि अंदरूनी सर्वे में उनकी स्थिति खराब थी, इसलिए पार्टी ने उनका टिकट काटा, तो उन्होंने पूरी दमदारी से इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कोई नकारात्मक सर्वे कभी नहीं हुआ। भविष्य की भूमिका के सवाल पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "पार्टी मुझे जिस भी भूमिका में देखना चाहेगी, मैं उसी रूप में काम करूंगा। यदि संगठन मुझे कोई नया दायित्व नहीं भी देता है, तो भी मैं एक समर्पित कार्यकर्ता की जिम्मेदारी के साथ मैदान में डटा रहूंगा।"
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