प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन! हाईकोर्ट ने मुरार तहसीलदार का आदेश निरस्त किया; जानें 4 प्रमुख फैसले
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने मुरार तहसीलदार के 2019 के आदेश और अशोकनगर के मिड-डे मील समूह को हटाने के आदेश को निरस्त किया। वहीं बीहड़ भूमि पर याचिका खारिज कर ठेकेदार की वसूली पर सरकार से जवाब मांगा।
ग्वालियर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने राजस्व मामलों, शासकीय भूमि आवंटन, मिड-डे मील संचालन और ठेकेदारों से वसूली से जुड़े चार अलग-अलग महत्वपूर्ण मामलों में अहम फैसले सुनाए हैं. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित पक्ष को नोटिस और सुनवाई का अवसर दिए बिना लिया गया कोई भी प्रशासनिक निर्णय 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' का स्पष्ट उल्लंघन है.
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के ने राजेंद्र प्रसाद गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुरार (ग्वालियर) तहसीलदार द्वारा पारित 31 दिसंबर 2019 के समीक्षा (रिव्यू) आदेश को निरस्त कर दिया है. मामला मुरार के सर्वे नंबर 1862 की भूमि से जुड़ा है, जिसे 2012 में आबादी भूमि माना गया था और 2018 में संभागायुक्त ने भी इसकी पुष्टि की थी.
अदालत ने पाया कि 2019 में बिना किसी नोटिस या प्रभावी सुनवाई का अवसर दिए तहसीलदार ने समीक्षा कर पुराने आदेश को निरस्त कर दिया था. यह मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 51 और प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन है. कोर्ट ने प्रशासन को कानून के अनुसार नई कार्रवाई की छूट देते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी नई समीक्षा से पहले संबंधित पक्ष को नोटिस देकर सुनवाई का पूरा अवसर देना अनिवार्य होगा.
एक अन्य मामले में, ग्वालियर खंडपीठ ने मुरैना जिले की सरकारी बीहड़ चरनोई भूमि (Ravine Grazing Land) पर फलदार पौधे लगाने की अनुमति देने और सीमेंट उद्योग की स्थापना रोकने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है. मुरैना निवासी बालकृष्ण शर्मा ने सर्वे नंबर 1280 की 1.714 हेक्टेयर भूमि को लेकर याचिका दायर की थी.
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि यह भूमि राजस्व रिकॉर्ड में बीहड़ चरनोई दर्ज है और इसका एक हिस्सा जिला व्यापार एवं उद्योग विस्तार परियोजना के लिए आरक्षित है. न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के ने आदेश में कहा कि मप्र भू-राजस्व संहिता की धारा 239(2) के तहत सरकारी भूमि पर पौधारोपण की अनुमति केवल निर्धारित श्रेणियों में ही दी जा सकती है. कानून के विपरीत जाकर अदालत ऐसी अनुमति देने का निर्देश नहीं दे सकती.
अशोकनगर जिले में मिड-डे मील वितरण का कार्य कर रहे 'श्रद्धा स्वयं सहायता समूह' को बड़ी राहत देते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें हटाने के आदेश को निरस्त कर दिया है. समूह ने जनपद पंचायत सीईओ द्वारा 4 जुलाई 2025 को जारी अनुबंध समाप्ति के आदेश को चुनौती दी थी.
अदालत ने पाया कि मिड-डे मील योजना की नीति के अनुसार जनपद पंचायत सीईओ को केवल जांच कर रिपोर्ट भेजने का अधिकार है, जबकि अंतिम निर्णय लेने का अधिकार जिला पंचायत के सीईओ (सक्षम प्राधिकारी) को है. न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के ने जनपद सीईओ के आदेश को अधिकार क्षेत्र से बाहर मानते हुए रद्द कर दिया और निर्देश दिया कि यदि कार्रवाई करनी है, तो पहले कारण बताओ नोटिस जारी कर जिला पंचायत सीईओ स्तर से ही नियम अनुसार निर्णय लिया जाए.
हाईकोर्ट द्वारा सुनाए गए चारों फैसलों का ब्योरा नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| प्रकरण / विषय | पीठ (पीठ के जज) | मुख्य कानूनी बिंदु / निर्णय |
| मुरार भूमि समीक्षा विवाद | न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के | 2019 का तहसीलदार आदेश निरस्त; बिना नोटिस समीक्षा अवैध. |
| मुरैना बीहड़ चरनोई भूमि | न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के | याचिका खारिज; धारा 239(2) के तहत गैर-निर्धारित भूमि पर अनुमति नहीं. |
| अशोकनगर मिड-डे मील समूह | न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के | हटाने का आदेश रद्द; जनपद CEO का आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर. |
| ठेकेदार देनदारी व आरआरसी | न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया व न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला | राज्य सरकार से 1 सप्ताह में जवाब तलब; बिना सुनवाई वसूली पर सवाल. |
एक ठेकेदार (एम/एस संजीव शर्मा) से की जा रही वसूली और संपत्ति कुर्की की कार्रवाई पर हाईकोर्ट की युगलपीठ ने राज्य सरकार से कड़ा जवाब तलब किया है. न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने सीमित प्रश्न पर नोटिस जारी कर पूछा है कि क्या विभाग ने 28 जनवरी 2025 को देनदारी तय करने से पहले ठेकेदार को सुनवाई का अवसर दिया था या नहीं?
याचिकाकर्ता के अनुसार, 2016 में भी हाईकोर्ट स्पष्ट कर चुका था कि अनिर्धारित हर्जाने की वसूली राजस्व वसूली प्रमाण-पत्र (RRC) से नहीं हो सकती. इसके बावजूद विभाग ने बिना वास्तविक देनदारी का निर्धारण किए सीधे कुर्की के आदेश दे दिए. शासन द्वारा समय मांगे जाने पर खंडपीठ ने राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.
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