शराब के लिए पैसे न देने पर तोड़ा था कंधा; जबलपुर हाईकोर्ट ने बरकरार रखी 6 माह की जेल की सजा
जबलपुर हाईकोर्ट ने शराब के लिए पैसे न देने पर पीड़ित का कंधा फ्रैक्चर करने वाले आरोपी धनीराम की अपील खारिज कर दी है। जस्टिस बीपी शर्मा की एकलपीठ ने घायल गवाह के बयान को मुख्य आधार मानते हुए 6 महीने की जेल की सजा बरकरार रखी।
जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (जबलपुर हाईकोर्ट) की एकलपीठ ने शराब पीने के लिए रुपये मांगने और मना करने पर पीड़ित के साथ मारपीट कर उसका कंधा फ्रैक्चर करने वाले आरोपी की याचिका खारिज कर दी है. हाईकोर्ट के जस्टिस बीपी शर्मा की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) के फैसले को पूरी तरह सही ठहराया और आरोपी की 6 महीने की कारावास की सजा को बरकरार रखा.
यह पूरा मामला नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा का है. पीड़ित हर प्रसाद वर्मा की शिकायत पर पुलिस ने धनीराम उर्फ कल्लू के खिलाफ मामला दर्ज किया था.
पीड़ित ने पुलिस को दी रिपोर्ट में बताया था कि 18 अक्टूबर 2025 को दोपहर के समय वह दूधिया नदी में स्नान कर अपने घर लौट रहा था. रास्ते में धनीराम ने उसे रोककर शराब पीने के लिए रुपयों की मांग की. जब उसने पैसे देने से साफ मना कर दिया, तो आरोपी ने उसके साथ लात-घूंसों से मारपीट शुरू कर दी. इस हमले में पीड़ित की कलाई, घुटने, कमर और कंधे पर गंभीर चोटें आईं. अस्पताल में कराए गए एक्स-रे में उसके बाएं कंधे में फ्रैक्चर पाया गया था.
ट्रायल कोर्ट से 6 महीने की सजा और जुर्माने से दंडित होने के बाद आरोपी धनीराम ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी.
अपीलकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष आरोप को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है. दलील दी गई कि शिकायतकर्ता ने अपने कोर्ट के बयान में 2,000 रुपये मांगने की बात कही, जबकि एफआईआर में 200 रुपये का उल्लेख था. इसके अलावा, चश्मदीद गवाह ने माना था कि पीड़ित नाली में गिर गया था और डॉक्टर ने भी स्वीकार किया कि ऐसी चोटें गिरने से आ सकती हैं.
केस से जुड़े मुख्य तथ्यों और कोर्ट के निर्णय का ब्योरा नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| विवरण / मापदंड | प्रकरण से जुड़ी आधिकारिक जानकारी |
| मामला व स्थान | दूधिया नदी मार्ग, गाडरवारा (नरसिंहपुर/जबलपुर) |
| आरोपी / अपीलकर्ता | धनीराम उर्फ कल्लू (निवासी - गाडरवारा) |
| पीड़ित / शिकायतकर्ता | हर प्रसाद वर्मा |
| सुनवाईकर्ता न्यायाधीश | जस्टिस बीपी शर्मा (एकलपीठ, MP हाईकोर्ट) |
| अंतिम निर्णय | अपील निरस्त; 6 महीने का कारावास व जुर्माना बरकरार |
हाईकोर्ट की एकलपीठ ने आरोपी के वकीलों द्वारा दिए गए तर्कों को पूरी तरह से असंतोषजनक माना और याचिका खारिज कर दी.
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