सतपुड़ा टाइगर रिजर्व: मानसून गश्त के लिए वनकर्मियों को मिली 'स्मार्ट स्टिक', जानें इसकी खूबियां

नर्मदापुरम के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (STR) में 600 वनकर्मी मानसून गश्त कर रहे हैं। वन्यजीवों और खुद की सुरक्षा के लिए सायरन वाली खास 'स्मार्ट स्टिक' का इस्तेमाल हो रहा है। पढ़ें पूरी खबर।

Jul 25, 2026 - 15:28
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सतपुड़ा टाइगर रिजर्व: मानसून गश्त के लिए वनकर्मियों को मिली 'स्मार्ट स्टिक', जानें इसकी खूबियां

नर्मदापुरम: एसटीआर (STR) के गेट पर्यटकों के लिए एक जुलाई से बंद हैं। इस दौरान टाइगर रिजर्व मानसून गश्त में व्यस्त है। करीब 600 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी 2100 वर्ग किलोमीटर इलाके में फैले एसटीआर क्षेत्र की सुरक्षा में जुटे हैं, ताकि मॉनिटरिंग को बेहतर किया जा सके। गश्त के दौरान सुरक्षा के लिए इन्हें एक खास स्टिक भी दी गई है।

🔦 कई खूबियों वाली स्मार्ट स्टिक का इस्तेमाल

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में मानसून गश्त के दौरान अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा एक विशेष छड़ी (स्मार्ट स्टिक) का उपयोग किया जा रहा है। इसके जरिए कर्मचारी वन्य प्राणियों के साथ-साथ स्वयं की सुरक्षा भी कर रहे हैं। इस विशेष स्टिक में लाइट, सायरन और हल्के इलेक्ट्रिक शॉक जैसी खूबियां हैं, जो जंगल में सुरक्षा में विशेष भूमिका निभा रही हैं। फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया, "हमारे कुछ एरिया में जहां एनिमल मूवमेंट ज्यादा है, वहां स्मार्ट स्टिक प्रदान की गई है। यह स्टिक एक तरह से अलार्म सिस्टम का काम करती है। यदि ग्रुप में कोई एक-दूसरे से अलग हो जाए, तो यह आवाज (सायरन) का काम करती है। साथ ही इसमें मौजूद लाइट सिस्टम अंधेरे में भी सुरक्षा को बेहतर बनाता है।"

👮 600 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी कर रहे गश्त

नर्मदापुरम स्थित सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया, "मानसून के दौरान 250 से अधिक एसटीआर फील्ड स्टाफ तैनात है। इसके अलावा 300 से अधिक वॉचर हैं। कुल मिलाकर लगभग 600 लोग पूरे सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की मानसून गश्त कर रहे हैं। एसटीआर लगभग 2100 वर्ग किलोमीटर एरिया में फैला है। यहां मानसून गश्त बहुत ही व्यवस्थित (सिस्टमैटिक) तरीके से होती है।"

🐘 पैदल गश्त के साथ हाथियों का भी सहारा

फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया, "मानसून के दौरान एक विशेष योजना बनती है, जिसमें फील्ड डायरेक्टर से लेकर फॉरेस्ट गार्ड तक विशेष अभियान चलाकर पैदल गश्त करते हैं। इसके अलावा एलीफेंट (हाथी) गश्त भी होती है। जब तेज बारिश या जलभराव के कारण पैदल गश्त संभव नहीं हो पाती, तो हाथियों का सहारा लिया जाता है।"

🚤 संवेदनशील क्षेत्रों में नाव से गश्त और कांबिंग ऑपरेशन

उन्होंने आगे बताया, "टाइगर रिजर्व का काफी क्षेत्र तवा और देनवा नदी से लगा हुआ है। इन क्षेत्रों में बोट (नाव) गश्त की जाती है। इसके अलावा 'टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स' भी इस विशेष गश्ती अभियान में शामिल रहती है। इसके साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में 'मानसून कांबिंग ऑपरेशन' चलाए जाते हैं। इसमें बहुत सारे लोग एक साथ चलते हैं और एक साथ बड़े इलाके को कवर करते हैं, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो और यदि होती है, तो तुरंत संज्ञान लिया जा सके।"

⚕️ सभी पेट्रोलिंग कैंपों में फर्स्ट एड किट की सुविधा

फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया, "टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों के साथ-साथ वनकर्मियों की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। यहां वायरलेस सिस्टम बहुत अच्छा है, जो नजदीकी बेस कैंप से जुड़ा होता है। इसके जरिए किसी भी घटना की जानकारी तुरंत मिल जाती है। साथ ही गश्ती वाहन 24 घंटे उपलब्ध रहते हैं, जो तत्काल घटनास्थल पर पहुंच जाते हैं। इसके अलावा सभी पेट्रोलिंग कैंपों पर डॉक्टरों द्वारा प्रमाणित (प्रिस्क्राइब) 'फर्स्ट एड किट' भी उपलब्ध कराई गई है।"

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