शहरी घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ा अपडेट, जरा सी लापरवाही बढ़ा देगी आपका खर्च
मध्य प्रदेश में 150 यूनिट तक बिजली बिल पर शासन का अनुदान मिलता है, लेकिन 151 यूनिट होते ही यह राहत समाप्त हो जाती है। जानें बिजली बिल का पूरा और सटीक गणित।
भोपाल: शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के बिजली बिल के आंकड़े बताते हैं कि बिजली की खपत में केवल एक यूनिट की बढ़ोतरी कई बार पूरे बिल पर बहुत बड़ा असर डाल देती है। इसका सबसे बड़ा कारण 150 यूनिट तक मिलने वाला मध्य प्रदेश शासन का अनुदान है, जो 151 यूनिट होते ही पूरी तरह समाप्त हो जाता है। यही वजह है कि 150 यूनिट तक अपेक्षाकृत बहुत कम बिल चुकाने वाले उपभोक्ता 151 यूनिट पर पहुंचते ही सीधे सामान्य और बिना सब्सिडी वाले बिल की श्रेणी में आ जाते हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सौ यूनिट बिजली खपत होने पर ऊर्जा शुल्क 519 रुपये, स्थायी प्रभार 134 रुपये, विद्युत शुल्क 47 रुपये और अन्य अधिभार जोड़कर मासिक बिल 706 रुपये बनता है। इसमें शासन की ओर से 606 रुपये का अनुदान मिलने के बाद उपभोक्ता को केवल सौ रुपये का अंतिम बिल भरना पड़ता है।
⚡ 150 से 151 यूनिट पर होता है सबसे बड़ा बदलाव
150 यूनिट तक मासिक बिल 1,026 रुपये बनता है, लेकिन 606 रुपये के शासन अनुदान के कारण अंतिम देय राशि मात्र 420 रुपये ही रह जाती है। वहीं, जैसे ही खपत 151 यूनिट पर पहुँचती है, ऊर्जा शुल्क बढ़कर 809.55 रुपये, स्थायी प्रभार 330 रुपये और विद्युत शुल्क 82 रुपये हो जाता है। इस प्रकार कुल मासिक बिल 1,231 रुपये बनता है, लेकिन इस स्तर पर शासन का अनुदान शून्य हो जाता है।
परिणामस्वरूप, उपभोक्ता को पूरे 1,231 रुपये का भुगतान करना पड़ता है। वहीं, दो सौ यूनिट खपत होने पर ऊर्जा शुल्क 1,155 रुपये, स्थायी प्रभार 420 रुपये और विद्युत शुल्क 123 रुपये तक पहुंच जाता है, जिससे मासिक बिल 1,711 रुपये बनता है। इसी तरह 250 यूनिट पर अंतिम बिल 2,199 रुपये और तीन सौ यूनिट पर बढ़कर 2,689 रुपये तक पहुँच जाता है। ईंधन व विद्युत क्रय समायोजन अधिभार भी खपत बढ़ने के साथ 5.76 रुपये से बढ़कर 20.65 रुपये तक पहुँच जाता है।
💡 उपभोक्ताओं के लिए जरूरी संकेत और सावधानी
150 यूनिट तक बिजली की खपत नियंत्रित रखने पर शासन के अनुदान का सीधा और बड़ा लाभ उपभोक्ताओं को मिलता है। लेकिन जैसे ही खपत 151 यूनिट पर पहुँचती है, यह राहत पूरी तरह समाप्त हो जाती है और ऊर्जा शुल्क, स्थायी प्रभार तथा विद्युत शुल्क सहित सभी मदों का पूरा वित्तीय भार उपभोक्ताओं पर आ जाता है। ऐसे में शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए अपनी मासिक बिजली खपत पर कड़ी निगरानी रखना आर्थिक रूप से बेहद लाभदायक साबित हो सकता है।
📊 शहरी क्षेत्र में एक माह घरेलू बिजली खपत व शुल्क का विवरण
| मद / विवरण | 100 यूनिट | 150 यूनिट | 151 यूनिट | 200 यूनिट | 250 यूनिट | 300 यूनिट |
| ऊर्जा प्रभार (₹) | 519 | 802.5 | 809.55 | 1155 | 1507.5 | 1860 |
| समय आधारित विद्युत शुल्क (टीओडी) (₹) | 0 | 0 | 0 | 0 | 0 | 0 |
| ईंधन एवं विद्युत क्रय समायोजन अधिभार (₹) | 5.76 | 8.91 | 8.99 | 12.82 | 16.73 | 20.65 |
| स्थायी प्रभार (₹) | 134 | 134 | 330 | 420 | 510 | 600 |
| विद्युत शुल्क (शासन कर) (₹) | 47 | 81 | 82 | 123 | 165 | 208 |
| कुल मासिक बिजली बिल (₹) | 706 | 1026 | 1231 | 1711 | 2199 | 2689 |
| मध्य प्रदेश शासन अनुदान (₹) | -606 | -606 | 0 | 0 | 0 | 0 |
| अंतिम देय बिल (₹) | 100 | 420 | 1231 | 1711 | 2199 | 2689 |
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