Mahakal Mandir Controversy: आम भक्तों पर पाबंदी, फिर डिजिटल क्रिएटर को गर्भगृह में प्रवेश क्यों? उज्जैन में मचा बवाल
महाकाल मंदिर के गर्भगृह में डिजिटल क्रिएटर के प्रवेश पर मचा बवाल। मंदिर समिति ने दी सफाई, सांसद ने की वीआईपी कल्चर की आलोचना।
उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की दर्शन व्यवस्था एक बार फिर विवादों के घेरे में है। मंदिर प्रबंधन ने जहाँ आम भक्तों के लिए गर्भगृह में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा रखा है, वहीं बीते दिनों एक डिजिटल क्रिएटर को गर्भगृह में प्रवेश देकर तस्वीरें खिंचवाने की अनुमति देने से भक्तों में भारी नाराजगी है। सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल होते ही लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर नियमों का पालन केवल आम जनता के लिए ही क्यों है?
📱 मोबाइल प्रतिबंध का उल्लंघन, बढ़ा आक्रोश
मंदिर परिसर में मोबाइल फोन ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है, इसके बावजूद गर्भगृह के अंदर से तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की गईं। डिजिटल क्रिएटर अक्षय आनंद द्वारा सोमवती अमावस्या के दिन ली गई इन तस्वीरों पर यूजर्स ने तल्ख टिप्पणी की है। लोगों का कहना है कि जहाँ एक ओर सामान्य श्रद्धालु 20 फीट दूर से दर्शन करने को मजबूर हैं, वहीं कुछ लोगों को वीवीआईपी सुविधा कैसे मिल रही है?
🛡️ मंदिर समिति और सांसद का पक्ष
इस मामले में मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने सफाई दी कि "संबंधित लोग एक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के साथ आए थे, इसलिए उन्हें गर्भगृह में प्रवेश दिया गया।" हालाँकि, उन्होंने न्यायाधीश का नाम सार्वजनिक नहीं किया। वहीं, उज्जैन-आलोट संसदीय क्षेत्र के भाजपा सांसद अनिल फिरोजिया ने स्पष्ट कहा है कि मंदिर में वीआईपी संस्कृति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "मैं खुद आम दर्शनार्थी की तरह दर्शन करता हूँ, भगवान के सामने कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।"
📋 दर्शन व्यवस्था के नियम और वास्तविकता
मंदिर के नियमानुसार गर्भगृह में केवल राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों, पुजारियों और संतों को ही प्रवेश की अनुमति है। आम दर्शनार्थियों के लिए मानसरोवर द्वार से प्रवेश और शीघ्र दर्शन के लिए 250 रुपये का शुल्क निर्धारित है। लेकिन बार-बार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने समिति की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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