बड़वानी आकाशीय बिजली गिरने से भारत में सालाना 25 से 30 हजार मोते, जबकि अमेरिका में मात्र 25 से 35 मौत, सांसद सुमर सिंह सोलंकी ने उठाया महत्वपूर्ण मुद्दा जानिए क्या बताई इसकी वजह
Delhi, आकाशीय बिजली, सांसद समर सिंह सोलंकी, राज्यसभा सांसद
दिल्ली आकाशीय बिजली से को लेकर राज्यसभा सांसद ने उठाया संसद में मुद्दा बोले अमेरिका में साल भर में होती है 30 से 35 मौतें जबकि भारत में सालभर 25 से 30 हजार मोते आकाशीय बिजली से
मानसून के सीजन में आकाशीय बिजली गिरने से होने वाले जान-माल के नुकसान के संबंध में राज्यसभा सांसद डॉ.सुमेर सिंह सोलंकी ने संसद में सवाल किया
आकाशीय बिजली की घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रत्येक गांव में तडित चालक लगाने व पीड़ित परिवार को निश्चित राशि प्रदान करने हेतु सांसद डॉ. सोलंकी ने सरकार से किया आग्रह।।
क्या बोले सुमेर सिंह सोलंकी
मैने व्यक्तिगत तौर पर आकाशीय बिजली से होने वाले नुकसान को महसूस किया है,क्योंकि मैने अपने जीवन के लगभग सारे वर्ष ऐसे माहौल में बिताए हैं:-
*बड़वानी:* संसद के बजट सत्र के दौरान सोमवार को राज्यसभा सांसद डॉ.सुमेर सिंह सोलंकी ने शून्य काल में मानसून सीजन में आकाशीय बिजली गिरने से होने वाले जान-माल के नुकसान के संबंध में किया सवाल।।
सांसद डॉ.सोलंकी ने अपने उक्त सवाल के माध्यम से सरकार से आग्रह किया कि दुनिया में प्रत्येक वर्ष लाखों लोगों की मृत्यु बिजली गिरने से हो रही है। और हर सेकंड में 40 बार अर्थात दिन में करीब तीस लाख बार बिजली गिरती है, जहाँ तक भारतवर्ष की बात है, आकाशीय बिजली की घटनाओं की शुरुआत प्री मानसून के दौरान होती है। विभिन्न अध्ययनों से पता चला है कि प्रत्येक वर्ष बिजली गिरने से लगभग 10 हजार से 15 हजार लोगों की मृत्यु केवल जून और जुलाई के दौरान होती है जो कि एक चिंता का विषय है।
राज्यसभा सांसद डॉ.सुमेर सिंह सोलंकी ने बताया कि जहां अमेरिका में हर साल बिजली गिरने से 30 से 35 लोगो की मौत होती है तो वही भारत में हर साल बिजली गिरने से 25 हजार से 30 हजार तक मौत हो जाती है। ऐसे बहुत से मामले हैं जिन्हें प्राकृतिक आपदा के तौर पर मानकर इन्हें रजिस्टर ही नही करवाया जाता। जबकि इसकी संख्या और भी अधिक है। जो कि शोध का एक विषय है। आकाशीय बिजली के कारण भारतवर्ष में सबसे ज्यादा मौतें खुले क्षेत्र में होती हैं, जैसे कि हम जानते हैं भारत कृषि प्रधान देश है और यहाँ की मुख्यत: आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। और ध्यान देने वाली बात यह है कि आकाशीय बिजली की दुर्घटनाएं भी इन्ही क्षेत्रों में होती हैं। किसी भी परिवार का कमाने वाला व्यक्ति इस आपदा का शिकार हो जाता है, हम समझ सकते हैं कि उस परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट जाता है, सरकारी मदद के नाम पर कुछ सहायता अगर मिल भी जाती है तो उससे उसके परिवार का गुजरा नही हो पता।
सांसद डॉ. सोलंकी ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर आकाशीय बिजली से होने वाले जान-माल की हानि महसूस किया है क्योंकि उन्होंने अपने जीवन के लगभग सारे वर्ष ऐसे माहौल में बिताएं हैं।
आकाशीय बिजली गिरने से भारत में हर दिन औसतन चार से अधिक लोगों की मौत हो रही है। बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में आकाशीय बिजली गिरने से मौत के सबसे अधिक मामले सामने आ रहे हैं। लेकिन फिर भी भारत सरकार या अन्य प्रदेश सरकार द्वारा इसे आपदा के तौर पर चिन्हित नहीं किया गया है, जिस कारण इससे मरने वालो को जितनी सहायता राशि मिलनी चाहिए उतनी नहीं मिल पाती है।
राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने सरकार एवं संबंधित मंत्री से आग्रह किया कि आज के सोशल मीडिया के युग में आकाशीय बिजली से होने वाली दुर्घटनाओं से बचने के लिए दामिनी एप्प को एक जन जागरण के माध्यम से इसका प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए ताकि इसकी पहुँच एक आम नागरिक तक पहुँच सके और इससे होने वाली दुर्घटनाओं से बचा जा सके। आकाशीय बिजली से बचाव हेतु भवनों के लिए बेंजामिन फ्रेंक्लिन द्वारा विकसित तड़ित चालक व्यवस्था सर्वाधिक श्रेष्ट है। देश के सभी सरकारी एवं प्राइवेट स्कूलों, सरकारी एवं प्राइवेट दफ्तरों, हाई राइज बिल्डिंगों एवं अन्य संस्थानों में अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए ताकि आकाशीय बिजली से होने वाली घटनाओं को रोका जा सके। आकाशीय बिजली से होने वाली मौतें सबसे ज्यादा गाँव में होती हैं तो एक ऐसी व्यवस्था होने चाहिए कि प्रत्येक गाँव में तडित चालक लगा दिए जाने चाहिए ताकि इतनी बड़ी संख्या में होने वाली मौतों को रोका जा सके आकाशीय बिजली से होने वाली मौतों से प्रभावित या पीड़ित परिवार के लिए, सरकार द्वारा आपदा के रूप में एक निश्चित राशि घोषित की जानी चाहिए ताकि उसके परिवार के जीवन यापन में कुछ सहयोग हो सके।
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