देश में अमन-चैन और अच्छी बारिश की कामना को लेकर पिछले 15 सालों से निकल रहा श्रद्धालुओं का जत्था

महाराष्ट्र के जालना से 30 श्रद्धालुओं का जत्था साइकिल से वैष्णो देवी के लिए रवाना हुआ है। देश में सुख-समृद्धि और अच्छी बारिश की कामना के साथ यह यात्रा बुरहानपुर पहुंची है।

Jul 30, 2026 - 19:20
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देश में अमन-चैन और अच्छी बारिश की कामना को लेकर पिछले 15 सालों से निकल रहा श्रद्धालुओं का जत्था

बुरहानपुर: देशभर में इस समय मानसून का मौसम पूरी तरह से सक्रिय है। बारिश कहीं लोगों के लिए आफत बनकर तो कहीं खुशियों की सौगात लेकर बरस रही है। हालांकि, इस बार मानसून के आने में हुई देरी के कारण देश के कई हिस्सों में लोग काफी चिंतित और परेशान नजर आ रहे हैं। ऐसे कठिन समय में लोगों ने भगवान की शरण लेते हुए धार्मिक अनुष्ठानों और आयोजनों की शुरुआत कर दी है। इसी क्रम में महाराष्ट्र के जालना जिले से 30 श्रद्धालुओं का एक समर्पित जत्था साइकिल के जरिए पवित्र वैष्णो देवी धाम के दर्शन के लिए रवाना हुआ है। 'जय भद्रा ग्रुप' के इन सदस्यों ने इस बार देश में अच्छी बारिश, अमन-चैन और चहुंओर सुख-समृद्धि की कामना को लेकर यह अनूठी साइकिल यात्रा निकाली है, जो अब मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में पहुँच चुकी है। बुरहानपुर के शाहपुर में स्थानीय नगरवासियों द्वारा इन यात्रियों का बेहद गर्मजोशी और भव्य स्वागत किया गया।

🚴‍♂️ महाराष्ट्र के जालना से शुरू हुई भक्तों की यह लंबी साइकिल यात्रा

महाराष्ट्र के जालना जिले से कुल 30 श्रद्धालुओं का यह जत्था साइकिल पर सवार होकर सीधे माता वैष्णो देवी के दरबार के लिए निकला है। खास बात यह है कि यह जत्था पहली बार इस तरह की लंबी यात्रा नहीं कर रहा है, बल्कि पिछले पूरे 15 वर्षों से लगातार इसी तरह साइकिल से यात्रा निकालते आ रहे हैं।

हर साल समाज से जुड़े किसी न किसी चर्चित मुद्दे या विशेष कामना को लेकर यह यात्रा आयोजित की जाती है और यह सिलसिला बिना रुके लगातार जारी है। इस साल भी यह ऊर्जावान जत्था जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित मां वैष्णो देवी के पवित्र दरबार तक की अपनी इस कठिन साइकिल यात्रा को पूरा करने में जुटा हुआ है। यात्रा के रास्ते में जैसे-जैसे यह जत्था आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे जगह-जगह लोगों द्वारा इनका जोरदार स्वागत किया जा रहा है। इस बार इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य देश में सुख और समृद्धि की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करना है।

💪 शरीर की थकान पर भारी पड़ी मां वैष्णो देवी के प्रति अटूट आस्था

यात्रा में शामिल श्रद्धालु शैलेश माधव ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि, ''हम लोग केवल अपनी व्यक्तिगत मनोकामनाओं के लिए नहीं, बल्कि पूरे महाराष्ट्र और संपूर्ण देश में सुख, शांति, भाईचारा और समृद्धि की कामना लेकर माता रानी के दरबार की ओर बढ़ रहे हैं।''

इस कठिन सफर की विशेषता बताते हुए उन्होंने कहा कि इस लंबे मार्ग पर धार्मिक आस्था हर कठिनाई पर भारी पड़ रही है। साइकिल से सैकड़ों किलोमीटर का यह लंबा सफर तय करना, इस दौरान बारिश और धूप की तमाम चुनौतियां झेलना, लगातार पेडल मारते-मारते शरीर का थक जाना—ये सारी मुश्किलें एक तरफ हैं, लेकिन मन में माता रानी के दर्शन की जो अथाह श्रद्धा है, वह इन सभी शारीरिक कष्टों पर भारी साबित होती है। इसी दृढ़ विश्वास और अटूट श्रद्धा के बल पर वे पिछले डेढ़ दशक से इस अनूठी परंपरा को पूरी निष्ठा के साथ निभाते चले आ रहे हैं।

🌹 स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं के पैरों पर छिड़का गुलाब जल और की पुष्पवर्षा

शाहपुर के स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने इस जत्थे का स्वागत करने का एक बेहद अनूठा तरीका अपनाया। लोगों का कहना है कि यह जत्था हर साल शाहपुर के रास्ते से होकर गुजरता है, इसलिए हम इन्हें यात्रा की थकान से राहत पहुँचाने के मकसद से इनके पैरों पर गुलाब जल और ठंडी जड़ी-बूटियों का लेप लगाते हैं ताकि साइकिल चलाते समय पैरों की थकान और दर्द कम हो सके।

इसके साथ ही, नगरवासियों ने इन पर पुष्पवर्षा की और माता रानी के जयकारों के साथ उनका भव्य स्वागत किया। उपस्थित सभी लोगों ने इन भक्तों की यात्रा के सकुशल, निर्विघ्न और सुखद रहने की मंगलकामना की।

🌱 पर्यावरण संरक्षण और ईधन की बचत का भी दे रहे हैं संदेश

इस यात्रा के बारे में विस्तार से बताते हुए श्रद्धालु गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि, ''करीब 15 साल पहले सिर्फ 11 युवाओं ने मिलकर इस साइकिल यात्रा की शुरुआत की थी। देश में सुख-समृद्धि, अमन-चैन और आपसी भाईचारा हमेशा बना रहे, इसी पवित्र भावना को लेकर यह यात्रा निरंतर चल रही है।''

उन्होंने बताया कि अब धीरे-धीरे देश की युवा पीढ़ी भी भारी संख्या में इस यात्रा से जुड़ती जा रही है। साइकिल यात्रा करने का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इससे बहुमूल्य ईंधन की भारी बचत होती है और पर्यावरण में किसी भी प्रकार का वायु प्रदूषण नहीं फैलता है। इसके चलते हमारा आसपास का वातावरण पूरी तरह संतुलित रहता है। युवा पीढ़ी का इस जागरूकता अभियान से जुड़ना इस बात का प्रमाण है कि यह परंपरा पिछले 15 सालों से सफलतापूर्वक आगे बढ़ रही है।

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