गांजा तस्कर शैलू कंजर पर भोपाल पुलिस का बड़ा शिकंजा, पहली बार लगाया गया पिट-एनडीपीएस एक्ट

भोपाल पुलिस ने आदतन गांजा तस्कर शैलू उर्फ शैलेश संकत के खिलाफ पहली बार पिट-एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए 6 महीने के निरोध का आदेश जारी किया है।

Aug 01, 2026 - 11:41
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गांजा तस्कर शैलू कंजर पर भोपाल पुलिस का बड़ा शिकंजा, पहली बार लगाया गया पिट-एनडीपीएस एक्ट

भोपाल। एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के गंभीर मुकदमे, बार-बार की गई गिरफ्तारियां और जेल की सजा भी जिस शातिर ड्रग तस्कर को अपराध के दलदल से नहीं रोक सकी, अब उस अपराधी के खिलाफ भोपाल पुलिस ने सबसे कड़ी और प्रभावी कानूनी कार्रवाई की है।

राजधानी के बागसेवनिया थाना क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटर गांजा तस्कर शैलू उर्फ शैलेश संकत (कंजर) के खिलाफ पुलिस ने पहली बार कड़े 'पिट-एनडीपीएस एक्ट' (PIT-NDPS Act) के तहत कार्रवाई की है।

भोपाल संभाग आयुक्त कर्मवीर शर्मा ने शातिर तस्कर के खिलाफ पूरे छह महीने के निरोध (Detention) का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। इस सख्त आदेश के तहत अब इस आरोपी को सीधे केंद्रीय जेल, इंदौर में निरुद्ध रखा जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि अब यह अपराधी किसी सामान्य आपराधिक मामले की तरह कोर्ट से ट्रायल या नियमित जमानत प्रक्रिया का लाभ लेकर आसानी से तुरंत बाहर नहीं आ सकेगा।

📦 बाहरी राज्यों से गांजा मंगवाकर भोपाल में फैला रखा था तस्करी का नेटवर्क

बागसेवनिया थाना प्रभारी अमित सोनी ने इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि 35 वर्षीय आरोपी शैलेश संकत वर्ष 2020 से लगातार अवैध रूप से गांजा तस्करी के काले कारोबार में लिप्त रहा है। वह मुख्य रूप से अन्य बाहरी राज्यों से भारी मात्रा में गांजा मंगवाकर भोपाल के अलग-अलग इलाकों में सप्लाई किया करता था।

पुलिस की पैनी नजर और गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने शहर और आसपास के इलाकों में कई बिचौलियों (Agents) और गुर्गों का एक मजबूत नेटवर्क खड़ा कर रखा था, जिसके जरिए वह अपनी तस्करी के इस अवैध धंधे को संचालित करता था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक आरोपी के खिलाफ अकेले एनडीपीएस एक्ट के 5 मामलों सहित कुल 42 संगीन आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं।

🔄 जेल से छूटने के महीनेभर बाद ही फिर से शुरू कर दी थी अवैध तस्करी

खास बात यह है कि कुछ समय पहले ही वह जेल से रिहा होकर बाहर आया था, लेकिन अपनी आदतों से लाचार होकर उसने जेल से बाहर आते ही महीनेभर के भीतर फिर से मादक पदार्थों की तस्करी का काम शुरू कर दिया था।

आरोपी की लगातार बढ़ती आपराधिक गतिविधियों और समाज पर पड़ने वाले इसके बुरे असर को देखते हुए बागसेवनिया थाना पुलिस ने उसका एक विस्तृत आपराधिक रिकॉर्ड (Dossier), तस्करी के पूरे नेटवर्क और उसकी हरकतों का एक मजबूत प्रस्ताव तैयार कर भोपाल संभाग आयुक्त कर्मवीर शर्मा के पास भेजा था।

जैसे ही संभाग आयुक्त द्वारा इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, तुरंत धारा 3(1), पिट-एनडीपीएस एक्ट, 1988 के तहत उसका निरोध आदेश जारी कर दिया गया। भोपाल पुलिस के अनुसार, कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद जिले में इस विशेष कानून के तहत किसी ड्रग तस्कर पर की गई यह अपनी तरह की पहली बड़ी कार्रवाई है।

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कहा कि यह सख्त कार्रवाई उन सभी आदतन और पेशेवर तस्करों के लिए एक कड़ा संदेश है, जो जेल की हवा खाने के बाद जमानत पर छूटकर एक बार फिर से अवैध कारोबार के दलदल में लौट आते हैं।

⚖️ क्या है 'पिट-एनडीपीएस' कानून और यह सामान्य एनडीपीएस से इतना सख्त क्यों है?

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि पिट-एनडीपीएस कानून सामान्य एनडीपीएस से कितना अलग है। इसके प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • यह मुख्य रूप से एक निरोधात्मक कानून (Preventive Law) है, न कि केवल सजा देने का प्रावधान।

  • इसे विशेष तौर पर आदतन, शातिर और संगठित ड्रग तस्करों पर ही लागू किया जाता है।

  • इसमें अपराध होने के बाद सजा देने की बजाय, भविष्य में संभावित अपराधों को रोकने के लिए एहतियातन कार्रवाई की जाती है।

  • इसके तहत प्रशासनिक आदेश के आधार पर सीधे आरोपी को लंबी अवधि के लिए जेल भेजा जा सकता है।

  • इसमें सामान्य अदालती आपराधिक ट्रायल की लंबी प्रक्रिया का इंतजार नहीं किया जाता है।

  • तय निरोध अवधि के दौरान आरोपी को किसी भी स्थिति में जमानत का लाभ नहीं मिलता और वह जेल में ही रहता है।

  • इस प्रकार की किसी भी बड़ी कार्रवाई से पहले पुलिस विभाग द्वारा एक विस्तृत डोजियर और पूरा आपराधिक इतिहास तैयार किया जाता है, जिसके बाद एक उच्चस्तरीय एडवाइजरी बोर्ड इसकी पूरी कानूनी समीक्षा करता है।

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