Iran Internal Politics: तेहरान-वॉशिंगटन समझौते पर बंटा ईरान, कट्टरपंथियों ने बताया 'हराम'; जानें क्या है मौजूदा स्थिति
ईरान-अमेरिका के बीच नए समझौते पर ईरान में गहराया मतभेद। कट्टरपंथी गुटों के विरोध और सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई की सख्त चेतावनी के बाद गरमाई ईरान की राजनीति।
तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए नए समझौते ने ईरान के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस समझौते को लेकर देश के भीतर विरोध और समर्थन की राजनीति अपने चरम पर है। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने एक कड़ा संदेश जारी करते हुए कहा कि ऐसे कदम या बयान, जो जनता के बीच अविश्वास और निराशा फैलाते हैं, वे केवल ईरान के दुश्मनों को लाभ पहुँचाते हैं। इस बयान को कट्टरपंथी समूहों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी माना जा रहा है।
⚔️ कट्टरपंथी गुटों का कड़ा विरोध
समझौते के बाद से ही ईरान के कई प्रभावशाली धार्मिक नेता और राजनीतिक समूह इसके विरोध में खुलकर सामने आए हैं। 'कायहान' अखबार के एडिटर हुसैन शरीयत मदारी और सांसद इस्माइल कोसारी जैसे नेता लगातार इस वार्ता को देशहित के खिलाफ बता रहे हैं। ईरानी वेबसाइट 'खबर ऑनलाइन' की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी टीवी चैनल IRIB और कई धार्मिक मौलवी इस समझौते के मुखर विरोधी हैं। मौलवी गुलामरेज़ा गासेमियन ने तो यहाँ तक कह दिया कि अमेरिका के साथ बातचीत करना 'हराम' है।
🛡️ सरकार और नेतृत्व की स्थिति
सुप्रीम लीडर के संदेश के बाद, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और प्रमुख नेता मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने स्पष्ट किया है कि वे सर्वोच्च नेतृत्व के निर्देशों का पूर्णतः पालन करेंगे और बातचीत की प्रक्रिया जारी रखेंगे। गालिबाफ ने विरोधियों को चेतावनी दी है कि जो लोग सर्वोच्च नेतृत्व के निर्देशों को चुनौती देंगे, उन्हें जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ सकता है। 'पायदारी पार्टी' जैसे कट्टरपंथी संगठन भी लगातार वार्ता टीम पर निशाना साध रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि अमेरिका के साथ रिश्ते सुधारने के मुद्दे पर ईरान की आंतरिक राजनीति फिलहाल गहरे मतभेदों से जूझ रही है।
📉 क्या थमेगा विरोध?
यद्यपि सुप्रीम लीडर के हस्तक्षेप के बाद विरोध की आवाजें थोड़ी धीमी जरूर हुई हैं, लेकिन ईरान के कट्टरपंथी धड़ों में अमेरिका के प्रति अविश्वास की गहरी जड़ें आज भी कायम हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार किस प्रकार इस आंतरिक विरोध को प्रबंधित करती है और क्या यह समझौता ईरान के भविष्य के लिए एक स्थायी रास्ता खोल पाएगा।
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