इंदौर की बेटी का कमाल: 16460 फीट ऊंचे ग्लेशियर पर फहराया परचम, माउंटेनियरिंग कोर्स में बनाई टॉप-5 में जगह

इंदौर की कनिका रघुवंशी ने अरुणाचल प्रदेश में कठिन माउंटेनियरिंग कोर्स पूरा किया। 16460 फीट ऊंचे ग्लेशियर पर 12 किलो वजन के साथ चढ़ाई कर टॉप-5 में बनाई जगह।

Jun 15, 2026 - 14:08
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इंदौर की बेटी का कमाल: 16460 फीट ऊंचे ग्लेशियर पर फहराया परचम, माउंटेनियरिंग कोर्स में बनाई टॉप-5 में जगह

इंदौर। इंदौर की बेटी कनिका रघुवंशी ने पर्वतारोहण (Mountaineering) के क्षेत्र में शहर का मान बढ़ाया है। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश स्थित 'नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड एडवेंचर स्पोर्ट्स' (NIMAS) से कठिन माउंटेनियरिंग कोर्स सफलतापूर्वक पूरा किया है। राऊ स्थित उमिया कन्या कॉलेज में बीबीए फर्स्ट ईयर की छात्रा कनिका ने इस चुनौतीपूर्ण कोर्स में देशभर से आए प्रतिभागियों के बीच अपनी जगह टॉप-5 में सुनिश्चित की।

🎒 ईंटों से भरी बैग के साथ की थी तैयारी

इस दुर्गम चढ़ाई को पूरा करने के लिए कनिका ने 12 किलो वजनी बैग के साथ 16460 फीट ऊंचे ग्लेशियर पर चढ़ाई की। जब चढ़ाई के दौरान अन्य प्रतिभागियों का हौसला टूटने लगा, तब कनिका की कठोर मेहनत रंग लाई। 1 एमपी गर्ल्स बटालियन एनसीसी की एएनओ कैप्टन नम्रता सावंत की सलाह पर, कनिका ने कोर्स शुरू होने से पहले ही अपने बैग में ईंटें भरकर दौड़ लगाने का अभ्यास किया था। यही शुरुआती तैयारी ग्लेशियर पर चढ़ने में उनके लिए संजीवनी साबित हुई।

🧗 बहुमुखी प्रशिक्षण और सर्वाइवल ट्रेनिंग

कनिका ने बताया कि कोर्स के दौरान उन्हें हर प्रकार की विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार किया गया:

  • क्लाइम्बिंग: एशिया की सबसे बड़ी आर्टिफिशियल क्लाइम्बिंग वॉल पर चढ़ने का अभ्यास।

  • सर्वाइवल स्किल्स: जंगल में जीवित रहने के लिए खुद टेंट लगाना, खाना बनाना और ट्रैकिंग करना।

  • रिवर क्रॉसिंग: नदियों को पार करने की तकनीक और रॉक क्लाइम्बिंग का प्रशिक्षण।

❄️ आइस क्लाइम्बिंग और मेराथांग कैंप का अनुभव

पर्वतारोहण कोर्स के दौरान कनिका ने जितांग (13500 फीट) और मेराथांग कैंप (14700 फीट) की ऊंचाइयों को पार किया। इसके बाद गोरिचेन ग्लेशियर पर 16460 फीट की ऊंचाई पर उन्होंने न केवल चढ़ाई की, बल्कि 'आइस क्लाइम्बिंग' का भी कठिन अभ्यास किया। कोर्स के दौरान आयोजित एक मील की दौड़ में वे सभी प्रतिभागियों में दूसरे स्थान पर रही थीं। कनिका की यह उपलब्धि इंदौर के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है।

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