Jabalpur Agriculture News: खरीफ की बोनी के समय सतर्क रहें किसान; नकली खाद का कारोबार करने वालों पर कृषि विभाग की बड़ी कार्रवाई
जबलपुर में नकली डीएपी खाद बनाने वाली फैक्ट्री का पर्दाफाश। ब्रांडेड कंपनियों की बोरियों में भरा जा रहा था फर्जी माल। 65 बोरी नकली खाद जब्त, जांच जारी।
जबलपुर। खरीफ फसलों की बोनी के समय किसानों को सावधान रहने की आवश्यकता है। जबलपुर कृषि विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पाटन के करौंदी गांव में नकली डीएपी (DAP) खाद बनाने वाली एक अवैध फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है। आरोपी ब्रांडेड कंपनियों की बोरियों का उपयोग कर नकली खाद तैयार कर रहे थे, जिसे बाजार में असली बताकर बेचा जा रहा था।
🏭 कैसे चल रहा था नकली खाद का खेल?
कृषि विभाग की अधिकारी इंद्रा त्रिपाठी ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर बहादुर सिंह के घर छापा मारा गया, जहाँ से लगभग 65 बोरी नकली डीएपी और पारिदीप फॉस्फेट कंपनी की 100 से अधिक खाली बोरियां बरामद हुई हैं। किसान कपिल राजपूत ने बताया कि नकली खाद बनाने वाले लोग सिंगल सुपर फॉस्फेट (बाजार मूल्य ₹500/बोरी) का उपयोग कर उसे ₹1500 मूल्य वाली डीएपी के नाम पर बेचकर प्रति बोरी ₹1000 तक का मुनाफा कमा रहे थे।
📉 ई-टोकन व्यवस्था और खाद का संकट
जबलपुर में खरीफ की मुख्य फसल धान की खेती के लिए किसानों को डीएपी और यूरिया की भारी आवश्यकता होती है। कई किसानों का आरोप है कि खाद वितरण के लिए लागू की गई 'ई-टोकन' व्यवस्था के कारण उन्हें पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल पा रही है। इसी किल्लत का लाभ उठाकर बाजार में नकली खाद के विक्रेता सक्रिय हो गए हैं, क्योंकि किसान मजबूरी में ऊंचे दाम देने के लिए तैयार हो जाते हैं।
⚠️ किसानों के लिए विशेष सतर्कता
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि खाद खरीदते समय हमेशा अधिकृत विक्रेता से ही माल लें और बिल जरूर प्राप्त करें। ब्रांडेड कंपनियों की पैकिंग होने के बावजूद यदि खाद की गुणवत्ता पर संदेह हो, तो तुरंत कृषि विभाग को सूचित करें। विभाग अब इस मामले की गहन जांच कर रहा है ताकि खाद के इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों को भी पकड़ा जा सके।
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