जहरीले सिरप कांड में हाईकोर्ट से दो आरोपियों को मिली जमानत; जानिए क्या है पूरा मामला
छिंदवाड़ा जहरीले कफ सिरप कांड में हाईकोर्ट से दो मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स को जमानत। 20 से ज्यादा बच्चों की मौत के मामले में लंबी न्यायिक हिरासत के बाद मिली राहत।
जबलपुर। छिंदवाड़ा जिले के बहुचर्चित जहरीले कफ सिरप कांड में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दो आरोपियों को बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट के जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने मामले में आरोपी मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव सतीश वर्मा और शैलेश सिंह पांड्या की जमानत याचिका मंजूर कर ली है। यह मामला 20 से अधिक बच्चों की मौत से जुड़ा है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था।
👨⚖️ आरोपियों का तर्क और बचाव
आवेदक सतीश वर्मा और शैलेश सिंह पांड्या की ओर से अधिवक्ता संकल्प कोचर ने पैरवी की। याचिका में तर्क दिया गया कि आरोपी महज मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (MR) थे और उनका कफ सिरप के निर्माण, भंडारण, वितरण या उसे नष्ट करने की प्रक्रिया से कोई सीधा संबंध नहीं है। आवेदकों का दावा है कि उन्हें सिरप में मिलावट या उसकी जहरीली प्रकृति की कोई जानकारी नहीं थी। वे अक्टूबर और नवंबर 2025 से न्यायिक अभिरक्षा में थे।
🛑 सरकार ने किया जमानत का कड़ा विरोध
राज्य सरकार की ओर से जमानत का पुरजोर विरोध किया गया। सरकारी पक्ष का तर्क था कि मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स की भूमिका केवल सप्लाई तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे मुख्य आरोपी डॉ. प्रवीण सोनी और फार्मा कंपनी के बीच एक 'महत्वपूर्ण कड़ी' थे। उन्होंने विवादित सिरप के प्रचार-प्रसार, आपूर्ति तंत्र को मजबूत करने और चिकित्सकों तक इसका नेटवर्क पहुँचाने में सक्रिय भूमिका निभाई थी। सरकार का दावा था कि जांच में आवेदकों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।
📝 हाईकोर्ट का सशर्त आदेश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, एकलपीठ ने आवेदकों को सशर्त जमानत प्रदान कर दी है। हालांकि, विस्तृत आदेश की प्रतियाँ फिलहाल प्रतीक्षित हैं। इस घटना ने दवा वितरण प्रणाली की सुरक्षा और रेगुलेशन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे, जिसकी सुनवाई अभी निचली अदालत में लंबित है। अब जमानत मिलने के बाद इस कानूनी लड़ाई का अगला चरण देखने लायक होगा।
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