इंदौर नगर निगम का एक्शन: बिजली बिलों की जाँच से पकड़ी जाएंगी अवैध व्यावसायिक संपत्तियाँ, 100 करोड़ का होगा फायदा

इंदौर नगर निगम राजस्व बढ़ाने के लिए बिजली बिलों और GIS सर्वे का सहारा लेगा। आवासीय घरों में चल रहे अवैध कमर्शियल उपयोग की होगी जाँच।

Jun 17, 2026 - 10:03
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इंदौर नगर निगम का एक्शन: बिजली बिलों की जाँच से पकड़ी जाएंगी अवैध व्यावसायिक संपत्तियाँ, 100 करोड़ का होगा फायदा

इंदौर। नगर निगम ने अपना राजस्व बढ़ाने के लिए एक नई रणनीति अपनाई है। अब निगम प्रशासन शहर के बिजली बिलों का बारीकी से विश्लेषण कर रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन आवासीय संपत्तियों में कमर्शियल (व्यावसायिक) गतिविधियों का संचालन हो रहा है। इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी सहायक राजस्व अधिकारियों को सौंपी गई है। निगम का अनुमान है कि इस कवायद से शहर के राजस्व में प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि हो सकेगी।

📊 कमर्शियल कनेक्शन और संपत्तियों के आंकड़ों में बड़ा अंतर

हालिया समीक्षा बैठक में यह तथ्य सामने आया कि शहर में बिजली के कमर्शियल कनेक्शनों की संख्या डेढ़ लाख से भी अधिक है, जबकि निगम के रिकॉर्ड में व्यावसायिक संपत्तियों की संख्या 80 हजार से कम दर्ज है। इससे स्पष्ट होता है कि बड़ी संख्या में लोगों ने अपने आवासीय परिसरों का व्यावसायिक उपयोग शुरू कर दिया है, लेकिन न तो इसकी सूचना निगम को दी और न ही संपत्तिकर (Property Tax) में कोई संशोधन कराया। अब नगर निगम ऐसी सभी संपत्तियों का सत्यापन कर उन्हें व्यावसायिक श्रेणी में दर्ज करेगा।

🌐 GIS सर्वे के जरिए होगी संपत्तियों की मैपिंग

राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से नगर निगम ने एक बार फिर 'GIS सर्वे' की तैयारी शुरू कर दी है। इस बार निगम किसी बाहरी एजेंसी पर निर्भर रहने के बजाय खुद यह सर्वे करेगा। इसके अंतर्गत निजी और सरकारी जमीनों, भवनों और संपत्तियों के क्षेत्रफल की सटीक जांच की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, शहर में कई संपत्तियां ऐसी हैं जिनका पूरा रिकॉर्ड निगम के पास उपलब्ध नहीं है। राजस्व विभाग अन्य विभागों के साथ समन्वय कर एक ठोस कार्ययोजना तैयार कर रहा है।

💡 भविष्य की कार्ययोजना

निगम अधिकारियों का कहना है कि वे राजस्व को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। आवासीय रिकॉर्ड पर चल रही व्यावसायिक संपत्तियों की पहचान करने के साथ-साथ GIS सर्वे के जरिए संपत्तियों के खातों में दर्ज क्षेत्रफल और अन्य जानकारियों का भी मिलान किया जाएगा। इस पूरी कवायद का उद्देश्य पारदर्शिता लाना और निगम की आय के स्रोतों को बढ़ाना है ताकि शहर के विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके।

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