कच्चा तेल और फेडरल रिजर्व की सख्ती से फीकी पड़ी सोने की चमक; क्या यह निवेश का सही समय है?
आज सोने की कीमतों में 800 रुपये की बड़ी गिरावट। अमेरिका-ईरान तनाव और फेडरल रिजर्व की सख्ती का असर। जानें आज का ताजा भाव और बाजार का नया अनुमान।
10 जुलाई को सर्राफा बाजार से लेकर वायदा बाजार तक सोने की कीमतों में जबरदस्त गिरावट देखी गई है। भारतीय मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 10 ग्राम सोने के भाव में 800 रुपये की कमी आई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पीली धातु के दाम दवाब में हैं। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीतियां इस गिरावट की मुख्य वजह हैं।
🛢️ कच्चे तेल की आग और महंगाई का डर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें बढ़ गई हैं। कच्चे तेल में उछाल सीधे तौर पर महंगाई (Inflation) को जन्म देता है। महंगाई को नियंत्रित करने के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व को ब्याज दरें ऊंची रखनी पड़ रही हैं, जिससे सोने का आकर्षण निवेशकों के बीच कम हो गया है। अर्थशास्त्र के जानकारों का मानना है कि जब तक ब्याज दरें ऊंची रहेंगी, सोने की कीमतों में सुधार की संभावना कम है।
💡 निवेशकों के लिए क्या है मौका?
बाजार विश्लेषक टिम वाटरर के अनुसार, फिलहाल बाजार 'कंसोलिडेशन' (ठहराव) के दौर में है। अमेरिका-ईरान के तनाव ने निवेशकों में अनिश्चितता पैदा की है। यदि कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर पर स्थिर रहती हैं, तो गिरावट के इस दौर में निचले स्तरों पर खरीदारी का एक अच्छा मौका बन सकता है। हालांकि, कच्चे तेल में और अधिक उछाल निवेशकों के सेंटीमेंट को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।
🏦 एचएसबीसी (HSBC) का संशोधित अनुमान
वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए एचएसबीसी बैंक ने सोने के भविष्य की कीमतों के अनुमान में कटौती की है। बैंक की नई रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के लिए औसत कीमत अब 4,560 डॉलर प्रति औंस रहने का अनुमान है। बैंक का मानना है कि इस साल के अंत तक सोना 4,750 डॉलर और अगले साल के अंत तक 5,025 डॉलर प्रति औंस के स्तर को छू सकता है, बशर्ते डॉलर और फेडरल रिजर्व की नीतियां अनुकूल रहें।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)