हॉलीवुड में एडिटिंग से लेकर IFFI के आमंत्रण तक; मध्य प्रदेश के युवा फिल्म निर्माता माही दुबे का कमाल
गुना (मप्र) के 23 वर्षीय माही दुबे बने देश के सबसे युवा फिल्म निर्माता। 13 की उम्र से सफर शुरू कर जीते 30+ अवॉर्ड्स और बनाया खुद का OTT प्लेटफॉर्म। पूरी कहानी पढ़ें।
गुना। मध्य प्रदेश के गुना के रहने वाले माही दुबे इतनी कम उम्र में फिल्म प्रोड्यूसर और डायरेक्टर बनकर देश भर के मीडिया और सिनेमा जगत में चर्चा का विषय बने हुए हैं। 23 वर्ष के माही ने महज 13 वर्ष की छोटी सी उम्र से ही अपने सिनेमाई सफर की शुरुआत कर दी थी। वे अब तक 30 से अधिक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। हाल ही में उन्हें नागपुर फिल्म फेस्टिवल में भी सर्वश्रेष्ठ अवॉर्ड से नवाजा गया है। इसके साथ ही माही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए फिल्म एडिटिंग का कार्य भी बेहद कुशलता से कर रहे हैं। भारतीय सिनेमा और डिजिटल एंटरटेनमेंट की दुनिया में आज कई युवा अपनी प्रतिभा, स्वतंत्र विचारों और नई अनूठी कहानियों के साथ आगे आ रहे हैं। माही दुबे एक ऐसे ही फिल्म निर्देशक और निर्माता हैं, जिन्होंने अपने रचनात्मक विजन और कहानी कहने के अनूठे अंदाज से इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। उनकी इसी प्रतिभा को देखते हुए भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा उन्हें 56वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) में अतिथि के रूप में भी आमंत्रित किया जा चुका है।
🏆 उपलब्धियों से भरा सफर: सीमित संसाधनों के बीच स्वतंत्र सिनेमा को चुना, अब तक 30 से अधिक पुरस्कारों से सम्मानित
मेनस्ट्रीम (कमर्शियल) सिनेमा से अलग हटकर, स्वतंत्र फिल्म निर्माण (Independent Filmmaking) का रास्ता चुनना किसी भी नवागंतुक के लिए आसान नहीं होता, लेकिन माही दुबे जैसे निर्देशकों ने इसे अपने जुनून, अटूट हौसले और कला के प्रति पूर्ण समर्पण से संभव कर दिखाया है। किसी भी सामान्य युवा फिल्म निर्माता की तरह, माही का सफर भी शुरुआती दौर में बेहद सीमित संसाधनों, तकनीकी कमियों और बजट की भारी चुनौतियों के बीच शुरू हुआ था। इन सबके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी बेहतरीन स्क्रिप्ट और निर्देशन के दम पर एक के बाद एक कई मील के पत्थर स्थापित किए। माही को उनकी शॉर्ट फिल्मों, डॉक्यूमेंट्री और फीचर फिल्मों के लिए अभी तक अलग-अलग मंचों पर 30 से अधिक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं, जो उनके हुनर का जीता-जागता प्रमाण हैं।
🚀 21 वर्ष की उम्र में खुद का OTT प्लेटफॉर्म: यूट्यूब से शुरुआत कर फ्लोरिडा के स्टूडियो तक पहुंचे, 'कुचक्र' वेब सीरीज से मचाया धमाल
सीमित संसाधनों के बावजूद माही ने सिनेमा जगत में अपना नाम मजबूती से स्थापित किया है और आज वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कार्य कर रहे हैं। माही दुबे ने महज 13 वर्ष की उम्र में यूट्यूब (YouTube) पर छोटी फिल्में बनाना शुरू किया था। इसके बाद अपनी लगन के दम पर 17 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपनी खुद की फिल्म प्रोडक्शन कंपनी "एमडी आर्ट्स प्रोडक्शंस" (MD Arts Productions) की स्थापना कर दी। सफलता का यह सफर यहीं नहीं रुका; 18 साल की उम्र में उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से फ्लोरिडा (यूनाइटेड स्टेट्स) स्थित प्रसिद्ध 'डी मेक' (D Make) स्टूडियो में एसोसिएट एडिटर के रूप में अंतरराष्ट्रीय कार्यभार संभाला। जब वे 21 वर्ष के हुए, तो उन्होंने अपनी पहली फीचर फिल्म 'टिकट एक संघर्ष' तैयार की और इसे थियेटरों में सफलतापूर्वक रिलीज कराया।
इस फिल्म की रिलीज के दौरान जब उन्हें डिस्ट्रीब्यूशन में चुनौतियों का सामना करना पड़ा, तो उन्होंने हार मानने के बजाय खुद का ही एक नया ओटीटी प्लेटफॉर्म (OTT Platform) प्रारंभ कर डाला। माही दुबे ने विशेष रूप से मध्य प्रदेश की माटी, संस्कृति और मुद्दों से संबंधित कई बेहतरीन फिल्में रिलीज की हैं। वे अब तक आठ अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में मुख्य एडिटर के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। सिनेमा व संस्कृति पर निरंतर अध्ययनरत माही के विचारप्रधान लेख पाञ्चजन्य और स्वदेश सहित विभिन्न प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित होते रहते हैं। माही द्वारा सड़क सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर निर्मित की गई फिल्म "नागरिक कर्तव्य" को भारी सराहना मिली और इस फिल्म ने 16 से अधिक पुरस्कार अपने नाम किए। इसके साथ ही माही द्वारा निर्देशित बेहतरीन सस्पेंस वेबसीरीज "कुचक्र" हिपिक्स ओटीटी (Hipix OTT) पर रिलीज होकर दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुई है।
🙏 सफलता का मूल मंत्र: ईश्वर पर विश्वास रखें और कर्म पर ध्यान दें, परिणाम निश्चित ही सकारात्मक होगा
अपनी इस असाधारण सफलता और प्रेरक सिनेमाई यात्रा को लेकर एक विशेष बातचीत में युवा फिल्म निर्माता-निर्देशक माही दुबे ने अपने दिल की बात साझा की। उन्होंने देश के अन्य युवाओं और उभरते हुए कलाकारों को संदेश देते हुए कहा, "जीवन में किसी भी बड़े या चुनौतीपूर्ण कार्य को करने के लिए सबसे पहले ईश्वर पर अटूट विश्वास रखें। जब आप पूरी ईमानदारी से प्रयास करते हैं, तो सफलता की चिंता छोड़ देनी चाहिए। आपका पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ अपने कार्य की गुणवत्ता पर होना चाहिए। यदि आपकी नीयत साफ है और मेहनत सच्ची है, तो निश्चित ही आपको जीवन में एक दिन बड़ी सफलता प्राप्त होगी।"
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