महाकाल मंदिर में सोने-चांदी के दान का क्या है नियम? उप प्रशासक सिम्मी यादव ने बताया पूरा सच

उज्जैन महाकाल मंदिर में दान किए जाने वाले सोने-चांदी के आभूषणों की जांच 3 सदस्यीय समिति द्वारा लाइव रिकॉर्डिंग और CCTV की कड़ी निगरानी में की जाती है।

Jul 16, 2026 - 19:52
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महाकाल मंदिर में सोने-चांदी के दान का क्या है नियम? उप प्रशासक सिम्मी यादव ने बताया पूरा सच

उज्जैन। आजकल देश के कई मंदिरों में दान किए गए आभूषणों के नकली निकलने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. इसके अतिरिक्त, मंदिरों में चढ़ाए गए गहने और नगदी चोरी होने की घटनाएं भी सुर्खियों में रहती हैं. लेकिन इन सबसे इतर, विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर (महाकाल) मंदिर प्रबंधन समिति दान को लेकर अत्यधिक पारदर्शिता रखती है. चाहे नगद राशि का दान हो या फिर सोने-चांदी के बहुमूल्य आभूषण, यहां हर एक चीज का हिसाब-किताब बेहद साफ और पारदर्शी रहता है. मंदिर की सभी दानपेटियों के आसपास सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं और वहां सुरक्षा गार्ड भी तैनात रहते हैं. इसके अलावा, दान में आने वाले आभूषणों की परख के लिए एक विशेष समिति गठित की गई है, जो आभूषणों की गहनता से जांच करती है.

🔍 2. तीन सदस्यीय समिति करती है सोने-चांदी का मूल्यांकन: सीसीटीवी और लाइव रिकॉर्डिंग में होती है जांच

महाकाल मंदिर में भक्तों द्वारा श्रद्धापूर्वक चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों की शुद्धता जांचने के लिए 3 सदस्यीय विशेष समिति काम करती है. इस समिति में एक अधिकृत ज्वैलर (मूल्यांकनकर्ता), एक प्रशासनिक अधिकारी और मंदिर समिति का एक जिम्मेदार कर्मचारी शामिल होता है. आभूषणों की यह जांच प्रक्रिया न केवल सीसीटीवी की कड़ी निगरानी में होती है, बल्कि इसकी लाइव रिकॉर्डिंग भी की जाती है. श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की उप प्रशासक व स्टोर प्रभारी सिम्मी यादव (डिप्टी कलेक्टर) ने बताया, "महाकाल मंदिर में भक्तों द्वारा जितने भी आभूषण दान किए जाते हैं, उन सभी की कैमरों की मदद से सतत निगरानी की जाती है. मंदिर परिसर के सभी दान काउंटर कैमरों की जद में हैं. जब भी कोई श्रद्धालु दान काउंटर पर बहुमूल्य धातु अर्पित करने आता है, तो उससे उस आभूषण का पक्का बिल मांगा जाता है."

🧾 3. रसीद देने से पहले दानकर्ता से लिया जाता है बिल: स्टोर में दर्ज होता है आभूषणों का एक-एक रिकॉर्ड

दानकर्ता से आभूषण का बिल प्राप्त करने के बाद, मंदिर समिति द्वारा उन्हें एक आधिकारिक रसीद प्रदान की जाती है. इसके पश्चात दान में मिली सामग्री को पूरी सुरक्षा के साथ सीधे स्टोर रूम में रखवा दिया जाता है. स्टोर में यह तीन सदस्यीय समिति आभूषणों का भौतिक और वैज्ञानिक मूल्यांकन करती है. सोने-चांदी के आभूषणों को समिति द्वारा हर आवश्यक पैमाने पर परखा जाता है. इसके बाद मूल्यांकनकर्ता द्वारा एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाती है, जिसमें सोने या चांदी की शुद्धता का सटीक प्रतिशत अंकित कर उसका बाजार मूल्य तय किया जाता है. यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है और मंदिर एक्ट लागू होने के समय से ही इसी सुव्यवस्थित प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है.

⚡ 4. अब ऑन-स्पॉट जांच के लिए आएगी हाईटेक मशीन: ज्वैलर रवींद्र सोनी ने साझा किया अपना अनुभव

डिप्टी कलेक्टर व उप प्रशासक सिम्मी यादव ने आगे बताया, "दान में मिलने वाले आभूषणों को मौके पर ही (ऑन-स्पॉट) सत्यापित किया जाता है. आभूषणों की तत्काल और सटीक जांच के लिए मंदिर प्रबंध समिति जल्द ही एक आधुनिक गोल्ड टेस्टिंग मशीन खरीदने की योजना बना रही है. इस तरह की मशीनें आमतौर पर बड़े ज्वैलरी शोरूम में देखने को मिलती हैं. इसकी मदद से बिना किसी नुकसान के तत्काल सोने-चांदी का टंच (शुद्धता का प्रतिशत) पता लगाया जा सकेगा."

मूल्यांकन समिति के सदस्य व ज्वैलर रवींद्र सोनी ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया: "मैं वर्ष 2020-21 से इस प्रतिष्ठित मूल्यांकन समिति में सेवाएं दे रहा हूँ. कई बार ऐसा होता है कि श्रद्धालु अनजाने में या गलती से कोई छोटी-मोटी मिश्रित धातु की चीजें चढ़ा जाते हैं. लेकिन भगवान के लिए आने वाले बड़े मुकुट, कुंडल और छत्र आदि पूरी तरह से शुद्ध और असली पाए जाते हैं. कभी-कभी श्रद्धालुओं के साथ फ्रॉड ज्वैलर्स द्वारा की गई धोखाधड़ी के कारण उनका खरीदा हुआ सामान खोटा निकल जाता है, हालांकि ऐसे मामले बेहद कम देखने को मिलते हैं."

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