बीमा कंपनी को तगड़ा झटका, कोरोना मरीज को 26,224 रुपये और मुआवजा देने का आदेश
जबलपुर उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को मेडिक्लेम के शेष 26,224 रुपये और मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। कोविड इलाज के दौरान बिल में कटौती की गई थी।
जबलपुर: जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बीमा कंपनी को आदेशित किया है कि वह परिवादी मंगीलाल चोपड़ा को 26,224 रुपये और अतिरिक्त भुगतान करे। आयोग ने अपने फैसले में यह स्पष्ट रूप से माना कि बीमा कंपनी द्वारा उपचार के बिलों में की गई कटौती अनुचित थी और उक्त राशि परिवादी को हर हाल में देय थी।
⚖️ क्या था पूरा विवाद और मेडिक्लेम क्लेम का मामला?
अधिवक्ता अरुण जैन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, गोरखपुर, जबलपुर के निवासी मंगीलाल चोपड़ा की एक मेडिक्लेम पॉलिसी 31 अक्टूबर 2019 से लेकर 30 अक्टूबर 2020 तक वैध और प्रभावी थी।
इसी दौरान कोरोना संक्रमण की चपेट में आने पर उन्होंने जबलपुर के प्रसिद्ध मेट्रो हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में अपना कोविड उपचार कराया था।
🏥 1.40 लाख के बिल में से बीमा कंपनी ने काटे थे 66,328 रुपये
अस्पताल में चले उपचार के बाद कुल 1.40 लाख रुपये का बिल भुगतान के लिए प्रस्तुत किया गया था।
लेकिन बीमा कंपनी ने इस पूरे बिल में से केवल 66,328 रुपये का ही भुगतान किया। शेष राशि की कटौती को पूरी तरह अनुचित और मनमाना बताते हुए परिवादी ने न्याय के लिए उपभोक्ता आयोग की शरण ली थी।
🦠 कोविड उपचार की परिस्थितियों पर उपभोक्ता आयोग की अहम टिप्पणी
मामلے की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि बीमा कंपनी ने कुल 78,672 रुपये का भुगतान स्वीकार किया था, जबकि उपचार से जुड़े दस्तावेजों और बिल में कुल 1,04,896 रुपये की भारी-भरकम कटौती दर्शाई गई थी।
आयोग ने कोविड-19 महामारी के शुरुआती दौर यानी प्रथम वर्ष के दौरान इलाज की असाधारण परिस्थितियों और उपलब्ध सभी अभिलेखों का बारीकी से परीक्षण किया, जिसके बाद 1,04,896 रुपये की कुल कटौती में से 26,224 रुपये को सीधे तौर पर परिवादी को देय माना।
💰 दो माह के भीतर करना होगा भुगतान, न करने पर लगेगा ब्याज
उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह निर्धारित 26,224 रुपये की राशि आदेश जारी होने की तारीख से दो महीने के भीतर अनिवार्य रूप से भुगतान करे।
यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है, तो कंपनी को 6 अगस्त 2021 से लेकर भुगतान की तिथि तक सात प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज भी चुकाना होगा।
🛡️ मानसिक क्षतिपूर्ति और परिवाद व्यय का भी देना होगा हर्जाना
इसके अलावा, आयोग ने परिवादी को हुई मानसिक परेशानी के एवज में 5,000 रुपये और वाद दायर करने के खर्च (परिवाद व्यय) के रूप में 2,000 रुपये अलग से देने के निर्देश दिए हैं।
यह बहुप्रतीक्षित और न्यायसंगत आदेश 12 मई 2026 को आयोग के अध्यक्ष नवीन कुमार सक्सेना, सदस्य सुषमा पटेल और मनोज कुमार मिश्रा की खंडपीठ द्वारा संयुक्त रूप से पारित किया गया है।
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