गंगानगर की घटना के बाद एमपीसीजी में गरमाया रिश्वतखोरी का मामला, लाइनमैन पर गिरी गाज
जबलपुर में स्थायी बिजली कनेक्शन के लिए 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगने वाले लाइनमैन का ऑडियो वायरल होने के बाद उसे सस्पेंड कर दिया गया है। पीड़ित महिला ने की थी शिकायत।
जबलपुर: संस्कारधानी जबलपुर में नए बिजली कनेक्शन के नाम पर चल रहे अवैध वसूली और रिश्वत के खेल की कलई एक बार फिर खुल गई है। यहाँ नया घर बनाने वाले हर आम नागरिक को कनेक्शन लेने के लिए बिजली कंपनी के लाइनमैन के माध्यम से ऊपर के अधिकारियों तक रिश्वत पहुँचाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। हालांकि इस परंपरा से हर कोई वाकिफ है, लेकिन इसके बावजूद यह घूसखोरी का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। जबलपुर में हाल ही में घटी एक ऐसी ही घटना में एक जागरूक ग्राहक ने लाइनमैन द्वारा रिश्वत मांगे जाने की पूरी बातचीत अपने फोन में रिकॉर्ड कर ली और उस ऑडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। हालांकि इस कार्रवाई के बाद आरोपी लाइनमैन को तो सस्पेंड कर दिया गया है, लेकिन पीड़ित परिवार को अब तक नया बिजली कनेक्शन नहीं मिल पाया है।
⚡ बिजली कनेक्शन के आवेदन में शुरू हो जाता है भ्रष्टाचार का खेल
बिजली का कनेक्शन हर परिवार और घर की एक बुनियादी व अति आवश्यक जरूरत है। जब भी कोई नागरिक अपना नया मकान तैयार करता है, तो उसे बिजली आपूर्ति के लिए बिजली कार्यालय जाना पड़ता है।
शुरुआती दौर में निर्माण कार्य के दौरान कोई स्थायी पता न होने के कारण बिजली विभाग द्वारा 'अस्थायी कनेक्शन' (Temporary Connection) दिया जाता है, जिसके लिए एकमुश्त राशि जमा करवानी पड़ती है। लेकिन, जैसे ही मकान पूरी तरह बनकर तैयार हो जाता है, लोग स्थायी कनेक्शन के लिए औपचारिक आवेदन करते हैं। और यहीं से असली खेल शुरू होता है—आवेदन मिलते ही बिजली विभाग के कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों और अधिकारियों द्वारा फाइल में बेवजह अड़चनें और तकनीकी कमियां दिखाना शुरू कर दिया जाता है।
💸 लाइनमैन अरुण विश्वकर्मा ने महिला से मांगे थे 10,000 रुपए
इस ताज़ा मामले में जबलपुर के गंगानगर इलाके में रहने वाली पल्लवी शर्मा ने अपने नवनिर्मित मकान के लिए स्थायी बिजली कनेक्शन का आवेदन किया था।
जब पल्लवी शर्मा के भाई कनेक्शन की प्रक्रिया के सिलसिले में बिजली ऑफिस पहुँचे, तो वहाँ उनकी मुलाकात अरुण विश्वकर्मा नाम के एक लाइनमैन से हुई। लाइनमैन अरुण विश्वकर्मा ने बेधड़क होकर पल्लवी से कहा कि, "आपको बिजली का स्थायी कनेक्शन मिल पाना संभव नहीं है, क्योंकि आपके घर से मुख्य बिजली के खंभे की दूरी बहुत ज्यादा है। ऐसी स्थिति में हम आपको कनेक्शन नहीं दे सकते; लेकिन फिर भी यदि आप हर हाल में कनेक्शन लगवाना चाहती हैं, तो मुझे 10,000 रुपए दीजिए, मैं आपका काम करवा दूंगा।"
🎙️ जागरूक महिला ने बिना डरे रिकॉर्ड कर ली रिश्वतखोरी की बातचीत
पल्लवी शर्मा का स्पष्ट रूप से कहना था कि, "मैं पूरी तरह वैध और कानूनी तरीके से कनेक्शन ले रही हूँ, किसी भी तरह का अवैध काम नहीं कर रही हूँ, इसलिए मैं एक भी रुपया रिश्वत के रूप में नहीं दूँगी।"
इस पर लाइनमैन अरुण ने उन्हें नियमों का हवाला देते हुए कई तरह की प्रशासनिक समस्याएं गिनानी शुरू कर दीं और कहा कि ऐसी स्थिति में उन्हें कनेक्शन मिलना नामुमकिन है। लेकिन पल्लवी एक बेहद जागरूक और समझदार नागरिक थीं, इसलिए उन्होंने लाइनमैन के साथ हुई इस पूरी बातचीत को अपने मोबाइल फोन में चुपचाप रिकॉर्ड कर लिया और इसकी आधिकारिक शिकायत सीधे जबलपुर के मुख्य बिजली कार्यालय में दर्ज करा दी।
🛑 वीडियो/ऑडियो वायरल होने के बाद लाइनमैन सस्पेंड, अधिकारियों ने दिया आश्वासन
शिकायतकर्ता पल्लवी शर्मा के साथ जबलपुर कांग्रेस के शहर अध्यक्ष सौरभ शर्मा भी बिजली दफ्तर पहुँचे और उन्होंने अधिकारियों को नियमों का हवाला देते हुए बताया कि, "विद्युत नियमों के अनुसार यदि घर से 50 मीटर के दायरे में भी कोई बिजली का खंभा मौजूद है, तो स्थायी कनेक्शन दिया जाना अनिवार्य है, जबकि पल्लवी के घर से मात्र 30 मीटर की दूरी पर ही बिजली का खंभा लगा हुआ है।"
उन्होंने आरोप लगाया कि स्थायी कनेक्शन में जानबूझकर तकनीकी अड़चनें पैदा कर रिश्वत मांगने की यह परंपरा पुरानी है, और सब कुछ जानते हुए भी जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के जबलपुर शहर के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजय अरोरा ने परेशान ग्राहकों की पूरी बात सुनी और उन्हें जल्द से जल्द वैध कनेक्शन दिलाने का ठोस आश्वासन दिया। इसके साथ ही, तुरंत कार्रवाई करते हुए रिश्वत मांगने वाले लाइनमैन अरुण विश्वकर्मा को निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया।
❓ बड़ा सवाल: क्या उच्चाधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव है यह सब?
पल्लवी शर्मा का परिवार एक सामान्य और साधारण परिवार है, जो मजबूरी में भी रिश्वत के 10,000 रुपए देने में असमर्थ था।
लेकिन यह भी कड़वी सच्चाई है कि हर नागरिक की स्थिति ऐसी नहीं होती; डर के मारे, या फिर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने और बेवजह की कागजी झंझट से बचने के लिए कई लोग चुपचाप इन लाइनमैनों को पैसे दे देते हैं। अब सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह उठता है कि क्या इस पूरी व्यवस्था को चला रहे बड़े और जिम्मेदार अधिकारियों को इस अवैध वसूली की भनक नहीं होती? और यदि उन्हें इसकी पूरी जानकारी है, तो वे आँखें बंद करके क्यों बैठे हैं? क्या इस भ्रष्टाचार के तार ऊपर बैठे अधिकारियों की जेब तक भी पहुँच रहे हैं?
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