औषधीय गुणों से भरपूर सर्पगंधा की खेती, जानिए इसके फायदे और कमाई का पूरा गणित
सर्पगंधा एक बेहद उपयोगी आयुर्वेदिक औषधि है, जिसकी जड़ 70,000 रुपये क्विंटल तक बिकती है। जानिए इसके औषधीय महत्व और खेती करने का तरीका।
शहडोल: प्रकृति ने हमें कई ऐसी अद्भुत और अनमोल चीजें दी हैं, जो आज भी मानव जीवन के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही हैं। इन्हीं में से एक है 'सर्पगंधा'। प्राचीन समय में यह पौधा केवल घने जंगलों में ही पाया जाता था, और पुराने समय के वैद्य जड़ी-बूटियों को जंगल से लाकर मरीजों पर इसका इस्तेमाल करते थे। तब सर्पगंधा वैद्यों के लिए एक अचूक दवा हुआ करती थी। हालांकि, समय के साथ अब इसकी व्यावसायिक खेती भी बड़े पैमाने पर होने लगी है, जिससे यह आसानी से उपलब्ध होने लगा है। आज के समय में सर्पगंधा केवल एक औषधीय पौधा ही नहीं, बल्कि कई किसानों और लोगों के लिए बंपर कमाई का एक बेहतरीन साधन बन चुका है।
🌿 सर्पगंधा क्या है और इसकी पहचान?
सर्पगंधा मूल रूप से एक ऐसा पौधा है जो पहले प्राकृतिक रूप से जंगलों में पाया जाता था, लेकिन मानव अज्ञानता और जानकारी के अभाव के कारण यह प्राकृतिक आवासों में विलुप्ति की कगार पर पहुँच रहा है। चूंकि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में यह एक बेहद उपयोगी पौधा है, इसलिए इसकी व्यावसायिक खेती की जाने लगी है।
सर्पगंधा का वानस्पतिक (बोटेनिकल) नाम 'राउवोल्फिया सर्पेंटिना' (Rauvolfia Serpentina) है और यह 'एपोसाईनेसी' कुल का सदस्य है। अंग्रेजी में इसे 'इंडियन स्नेकरूट' के नाम से भी जाना जाता है। यह एक छोटा, सदाबहार और सीधा बढ़ने वाला झाड़ीनुमा पौधा होता है, जिसके फूल सफेद या हल्के गुलाबी रंग के होते हैं। इसके फल छोटे और गोल होते हैं, जो पकने के बाद चमकीले बैंगनी-काले रंग के हो जाते हैं।
💊 सर्पगंधा का प्रमुख औषधीय महत्व
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉक्टर अंकित नामदेव बताते हैं कि, "सर्पगंधा का सबसे पहला लिखित उल्लेख प्राचीन 'सुश्रुत संहिता' में मिलता है। प्राचीन भारत में इस पौधे की जड़ का उपयोग मुख्य रूप से सर्पदंश (सांप के काटने) के इलाज में किया जाता था। बाद के समय में इसका उपयोग उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) और गंभीर अनिद्रा (नींद न आने की बीमारी) के मरीजों के लिए वरदान साबित होने लगा।"
यह पौधा मुख्य रूप से ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने का कार्य करता है। जिन मरीजों को नींद न आने की समस्या के कारण बीपी फ्लक्चुएट (घटता-बढ़ता) होता है, उनके लिए सर्पगंधा की जड़ का चूर्ण, घनवटी या इसके पेटेंटेड कंपाउंड्स का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है।
बाजार में सर्पगंधा की डिमांड बहुत अधिक है। क्लासिकल योग जैसे 'सर्पगंधा गुलिका' और कई अन्य पेटेंटेड योगों में आयुर्वेदिक कंपनियां इसका खुलकर उपयोग कर रही हैं। वैसे तो इस पौधे का पूरा पंचांग उपयोगी माना जाता है, लेकिन मुख्य रूप से इसकी जड़ का ही इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, किसी भी रूप में इसका उपयोग बिना चिकित्सक की सलाह के नहीं करना चाहिए।
💰 मुनाफा और खेती: कैसे दिलाता है सर्पगंधा तगड़ा पैसा?
सिया रोज गार्डन के संरक्षक आर.के. पटेल बताते हैं कि, "अब यह पौधा जंगलों में बमुश्किल ही देखने को मिलता है, लेकिन इसकी खेती की शुरुआत होने के बाद लोग इससे अच्छी-खासी कमाई कर रहे हैं।"
आर.के. पटेल के अनुसार, सर्पगंधा की जड़ बाजार में 60 से 70 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक बिकती है। इसके अलावा, इसका बीज भी 40 हजार रुपए क्विंटल के भाव तक बिकता है। आयुर्वेदिक दवा बनाने वाली बड़ी कंपनियां इसकी जड़ को भारी मात्रा में खरीदती हैं, जिससे इसकी मांग हमेशा बनी रहती है।
यदि इसकी खेती की बात की जाए, तो यह लगभग 18 महीने की फसल होती है। इसकी खेती शुरू करने के लिए पहले नर्सरी तैयार करनी पड़ती है, और फिर पौधे से पौधे की दूरी 20 सेंटीमीटर तथा क्यारी से क्यारी की दूरी 70 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। इसकी खेती बेहद आसान है और कई क्षेत्रों में इसे व्यावसायिक तौर पर उगाकर किसान मालामाल हो रहे हैं।
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