सड़क हादसों में मध्य प्रदेश बना देश का सिरमौर; हिट एंड रन के सबसे ज्यादा मामले, मुआवजे में पिछड़ा एमपी

मध्य प्रदेश में हिट एंड रन के मामलों में देश में नंबर-1। वर्ष 2024 में दर्ज हुए 12,453 मामले। मुआवजे के दावों के निपटारे में एमपी का प्रदर्शन बेहद खराब।

Jul 04, 2026 - 16:11
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सड़क हादसों में मध्य प्रदेश बना देश का सिरमौर; हिट एंड रन के सबसे ज्यादा मामले, मुआवजे में पिछड़ा एमपी

भोपाल। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा संसद में पेश किए गए ताजा आंकड़े मध्य प्रदेश की बदहाल सड़क सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं। देश में होने वाले कुल हिट एंड रन मामलों में मध्य प्रदेश लगातार शीर्ष पर बना हुआ है। वर्ष 2024 में देश भर में 68,584 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से अकेले मध्य प्रदेश में 12,453 मामले सामने आए। यह आंकड़ा देश के कुल मामलों का 18 प्रतिशत से अधिक है, जो राज्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

📊 यूपी-महाराष्ट्र से भी आगे एमपी की रफ्तार

आंकड़ों की तुलना करें तो उत्तर प्रदेश जैसे घनी आबादी वाले राज्य में भी 2024 में 11,209 मामले ही दर्ज हुए, जो मध्य प्रदेश के मुकाबले काफी कम हैं। वहीं, महाराष्ट्र में 6,485 और बिहार में 5,759 मामले सामने आए। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य प्रदेश में सड़क सुरक्षा के लिए लागू '4-ई फार्मूला' (एजुकेशन, इंजीनियरिंग, एनफोर्समेंट और इमरजेंसी केयर) जमीनी स्तर पर पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।

💰 मुआवजे में भारी लापरवाही, दावे हुए पेंडिंग

दुर्घटना के बाद मिलने वाले मुआवजे के मामले में मध्य प्रदेश का प्रदर्शन निराशाजनक है। 28 फरवरी 2026 तक एमपी में 929 दावे पंजीकृत किए गए, जिनमें से केवल 425 को ही भुगतान मिला। इसके उलट बिहार में 2,872 दावों का त्वरित निपटारा किया गया। मुआवजे में देरी के पीछे पुलिस कागजी कार्रवाई की कमी, बीमा कंपनियों की सुस्ती और पीड़ित परिवारों में जागरूकता का अभाव जैसे चार प्रमुख कारण सामने आए हैं।

💡 समाधान की दिशा में प्रयास

सरकार ने 'हिट एंड रन मोटर दुर्घटना पीड़ित मुआवजा योजना 2022' के तहत मृत्यु पर 2 लाख रुपये और गंभीर घायल होने पर 50,000 रुपये का मुआवजा निर्धारित किया है। मंत्रालय ने अब जिला सड़क सुरक्षा समितियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे बीमा कंपनियों के साथ समन्वय कर दावों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करें। साथ ही, हाईवे पर रफ्तार नियंत्रण के लिए हाईटेक कैमरे और रडार की निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

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