भोपाल के वैज्ञानिकों का कमाल: कैंसर पहचान के लिए देश का पहला AI टूल 'HISTO-UNET' विकसित, मिलेगी सटीक रिपोर्ट

भोपाल के वैज्ञानिकों ने विकसित किया देश का पहला AI कैंसर टूल 'HISTO-UNET'। 92% सटीकता से मिनटों में ओरल कैंसर की पहचान संभव। जानें इस क्रांतिकारी रिसर्च के बारे में।

Jun 16, 2026 - 15:44
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भोपाल के वैज्ञानिकों का कमाल: कैंसर पहचान के लिए देश का पहला AI टूल 'HISTO-UNET' विकसित, मिलेगी सटीक रिपोर्ट

भोपाल। राजधानी भोपाल के वैज्ञानिकों की एक संयुक्त टीम ने भारतीय डेटा-सेट के आधार पर देश का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कैंसर टूल 'HISTO-UNET' विकसित किया है। यह आधुनिक एआई (AI) टूल बायोप्सी स्लाइड्स का विश्लेषण कर महज कुछ मिनटों में यह सटीक जानकारी दे सकेगा कि मरीज को कैंसर है या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि विशेषकर सेंट्रल इंडिया में बढ़ते ओरल कैंसर के मामलों को देखते हुए, यह खोज समय पर पहचान करने में एक 'गेम-चेंजर' साबित होगी।

🤝 संयुक्त रिसर्च से मिली बड़ी कामयाबी

इस क्रांतिकारी तकनीक का निर्माण भोपाल के प्रमुख संस्थानों और वैश्विक सहयोग के जरिए संभव हुआ है। इसमें आईआईएसईआर (IISER) भोपाल, एम्स भोपाल, जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल और ब्रिटेन की प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों व शोधकर्ताओं ने करीब एक साल की कड़ी मेहनत के बाद इस एआई मॉडल को तैयार किया है।

🎯 92 प्रतिशत सटीकता के साथ त्वरित पहचान

शोधकर्ताओं के अनुसार, इस एआई टूल को प्रशिक्षित करने के लिए भारतीय मरीजों की 2,000 से अधिक बायोप्सी स्लाइड्स के डेटा का उपयोग किया गया है। स्थानीय डेटा-सेट पर आधारित होने के कारण इस टूल की एक्यूरेसी लेवल 92 प्रतिशत तक है। यह न केवल मुंह (ओरल) के कैंसर, बल्कि सिर और गर्दन में होने वाले घातक कैंसर (स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा) की कोशिकाओं को भी पूरी बारीकी से पहचानने में सक्षम है।

⏳ समय और मानवीय भूल की संभावना में भारी कमी

पारंपरिक रूप से लैब एक्सपर्ट्स को एक बायोप्सी स्लाइड का गहन अध्ययन करने में कम से कम 30 मिनट का समय लगता है, और पुष्टि के लिए दूसरे विशेषज्ञ की राय भी आवश्यक होती है। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग एक घंटा लग जाता है, लेकिन यह नया एआई टूल हाई-रिजॉल्यूशन हिस्टोपैथोलॉजी छवियों की मदद से कुछ ही मिनटों में परिणाम दे देता है। इससे डॉक्टरों पर काम का दबाव कम होगा और मरीजों का उपचार तुरंत शुरू हो सकेगा।

🌍 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली सराहना

भोपाल के वैज्ञानिकों की इस खोज को वैश्विक स्तर पर भी बड़ी पहचान मिली है। अप्रैल 2026 में लंदन में आयोजित 'इंटरनेशनल सिम्पोजियम ऑन बायोमेडिकल इमेजिंग' में इस महत्वपूर्ण शोध को प्रकाशित किया गया है। आईआईएसईआर भोपाल के निदेशक प्रो. गोवर्धन दास ने कहा कि भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने के लिए चिकित्सकों, इंजीनियरों और वैज्ञानिकों के बीच ऐसे साझा शोध प्रयासों की अत्यधिक आवश्यकता है।

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