लोकायुक्त के जाल में फंसे डॉक्टर की खुली पोल; मध्य प्रदेश के तीन जिलों में था तैनात, जांच शुरू
मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में बड़ा घोटाला। एक डॉक्टर तीन अलग-अलग जिलों में एक साथ पदस्थ। लोकायुक्त द्वारा रिश्वतखोरी में पकड़े जाने के बाद हुआ खुलासा।
शहडोल। रीवा लोकायुक्त द्वारा रिश्वत लेते पकड़े गए मेडिकल ऑफिसर डॉ. महेश चंद्र शर्मा के मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि यह डॉक्टर एक ही समय में मध्य प्रदेश के तीन अलग-अलग जिलों—शहडोल, श्योपुर और खरगोन में पदस्थ था। यह गंभीर अनियमितता सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।
📊 कैसे हुआ तीन जिलों में डॉक्टर का खेल?
डॉ. महेश चंद्र शर्मा साल 2021 से श्योपुर के विजयपुर ब्लॉक में तैनात थे, जबकि 2024-25 के दौरान उनकी शहडोल के उफरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी नियुक्ति हो गई। वहीं, यह भी पता चला है कि वे फरवरी 2023 से खरगोन के सेगांव ब्लॉक के केली शासकीय स्वास्थ्य केंद्र में भी संविदा मेडिकल ऑफिसर के रूप में पदस्थ थे। हैरानी की बात यह है कि तीनों जिलों में उनकी वीआईपी ड्यूटी भी लगती रही, लेकिन किसी भी स्तर पर यह गड़बड़ी पकड़ में नहीं आई।
📱 'सार्थक ऐप' से पकड़ में आया फर्जीवाड़ा
शहडोल में 'सार्थक ऐप' पर डॉक्टर की उपस्थिति लगातार कम दर्ज होने के कारण उनका वेतन रोक दिया गया था। इसी दौरान की गई विभागीय जांच में उनकी दोहरी और फिर तीसरी पदस्थापना का सच सामने आया। शहडोल के सीएमएचओ डॉ. राजेश मिश्रा ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए शिवपुरी (संबंधित क्षेत्र के वरिष्ठ कार्यालय) के सीएमएचओ से उनका पूरा सेवा रिकॉर्ड तलब किया गया है।
⚖️ रिश्वतखोरी और विभागीय लापरवाही
डॉ. महेश चंद्र शर्मा को हाल ही में रीवा लोकायुक्त टीम ने 5,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। अब इस गिरफ्तारी के बाद उनकी तीन अलग-अलग जिलों में तैनाती का मामला सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। यह स्पष्ट होना बाकी है कि इतनी बड़ी अनियमितता के पीछे किसकी मिलीभगत है और जॉइनिंग लेटर किस स्तर से जारी किए गए थे। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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