जबलपुर का 'वर्ल्ड क्लास' मदन महल स्टेशन: लिफ्ट में 1 घंटे तक फंसे रहे 15 यात्री, मैकेनिक तक नहीं था मौजूद

जबलपुर के मदन महल रेलवे स्टेशन पर लिफ्ट खराब होने से 15 यात्री एक घंटे तक फंसे रहे। स्टेशन पर मैकेनिक न होने से प्रशासन के वर्ल्ड क्लास दावों पर उठे सवाल।

Jun 16, 2026 - 15:59
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जबलपुर का 'वर्ल्ड क्लास' मदन महल स्टेशन: लिफ्ट में 1 घंटे तक फंसे रहे 15 यात्री, मैकेनिक तक नहीं था मौजूद

जबलपुर। मध्य प्रदेश में वर्ल्ड क्लास स्टेशन बनने का सपना देख रहे मदन महल स्टेशन पर सुविधाओं के नाम पर लापरवाही सामने आई है। सोमवार रात स्टेशन पर लगी एक लिफ्ट अचानक बंद हो गई, जिससे उसमें सवार 15 यात्री बुरी तरह फंस गए। हैरान करने वाली बात यह रही कि वर्ल्ड क्लास सुविधाओं से लैस होने का दावा करने वाले इस स्टेशन पर यात्रियों को बचाने के लिए उस समय कोई लिफ्ट मैकेनिक तक मौजूद नहीं था।

🎢 अमरकंटक एक्सप्रेस के यात्री लिफ्ट में हुए कैद

घटना मदन महल स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 4 की है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अमरकंटक एक्सप्रेस से उतरने वाले 15 यात्री लिफ्ट में सवार हुए थे। ओवरलोडिंग के कारण लिफ्ट कुछ दूर चलते ही बीच में ही अटक गई। लिफ्ट में महिलाएं और बच्चे भी मौजूद थे, जो घबराहट के कारण चीखने-चिल्लाने लगे। यात्रियों के फंसने की सूचना मिलते ही आरपीएफ जवान और एएसआई विजय कुमार सिंह मौके पर पहुँचे और यात्रियों को ढाढस बंधाया।

🛠️ मेन स्टेशन से बुलाना पड़ा मैकेनिक, यात्रियों का दम घुटता रहा

घटना रात करीब 9:40 बजे हुई। जब स्टेशन पर लिफ्ट इंजीनियर की तलाश की गई, तो पता चला कि मदन महल स्टेशन पर लिफ्ट मेंटेनेंस के लिए कोई भी मैकेनिक तैनात नहीं है। इसके बाद मुख्य स्टेशन से लिफ्ट मैकेनिक 'शिवा' को सूचना देकर बुलाया गया। मैकेनिक के आने और लिफ्ट खोलने की प्रक्रिया में करीब एक घंटा बीत गया। रात 10:30 बजे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिसके बाद यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों के बीच काफी विवाद भी हुआ।

🚆 वर्ल्ड क्लास स्टेशन के दावों पर सवाल

इस घटना ने मदन महल स्टेशन के प्रबंधन की लापरवाही को उजागर कर दिया है। जहाँ एक ओर रेलवे इसे वर्ल्ड क्लास सुविधाओं वाला स्टेशन बनाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था का यह हाल है कि इमरजेंसी के समय एक लिफ्ट मैकेनिक तक उपलब्ध नहीं है। घंटों तक लिफ्ट में बंद रहे यात्रियों को काफी मानसिक और शारीरिक कष्ट का सामना करना पड़ा, जिसने स्टेशन प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है।

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