टीम खंडेलवाल में बदलाव के संकेत, नए चेहरों की उम्मीद
भोपाल:- भाजपा की मध्यप्रदेश इकाई में जल्द ही बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के कार्यभार संभालने के बाद पार्टी संगठन में नई टीम गठन की तैयारियां तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, खंडेलवाल वरिष्ठ नेताओं से लगातार विचार-विमर्श कर रहे हैं और संगठन में जमीनी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
वरिष्ठ नेताओं से हो चुकी है बातचीत
खंडेलवाल ने अब तक जिन नेताओं से मुलाकात की है, उनमें शामिल हैं:
राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिव प्रकाश
राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
इसके अतिरिक्त, खंडेलवाल ने शनिवार को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा की। सिंधिया ने इस मुलाकात की पुष्टि करते हुए ट्वीट भी किया।
नए चेहरों को मिलेगा मौका, सांसद-विधायक होंगे बाहर?
सूत्रों का दावा है कि प्रदेश संगठन की नई टीम में पूर्णकालिक और सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके तहत, वर्तमान टीम में शामिल सात सांसद, एक कैबिनेट मंत्री और छह विधायकों को हटाया जा सकता है।
विष्णुदत्त शर्मा की टीम में जनप्रतिनिधियों का वर्चस्व
पूर्व अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा की टीम में शामिल थे:
14 प्रदेश उपाध्यक्ष
5 महामंत्री
13 प्रदेश मंत्री
इनमें से कई पदों पर सांसद और विधायक काबिज थे।
कुछ प्रमुख नाम:
उपाध्यक्ष: संध्या राय, सुमित्रा वाल्मीक, आलोक शर्मा, नागर सिंह चौहान, चिंतामण मालवीय
महामंत्री: कविता पाटीदार, हरिशंकर खटीक, भगवान दास सबनानी
मंत्री: लता वानखेड़े, आशीष दुबे, मनीषा सिंह
संयुक्त कोषाध्यक्ष: अनिल जैन कालूहेड़ा (विधायक)
अग्रिम संगठनों में भी बदलाव तय?
भाजपा के सात अग्रिम संगठनों में से तीन का नेतृत्व वर्तमान में सांसद और एक का मंत्री कर रहे हैं:
महिला मोर्चा: माया नारोलिया (राज्यसभा सांसद)
किसान मोर्चा: दर्शन चौधरी (सांसद)
ओबीसी मोर्चा: वर्तमान अध्यक्ष अब कैबिनेट मंत्री
नारायण सिंह कुशवाह (मंत्री) ने ओबीसी मोर्चा से हटने का अनुरोध किया है।
'फील्ड कार्यकर्ता-प्रथम' होगी नई टीम की पहचान
खंडेलवाल की प्राथमिकता है ऐसे कार्यकर्ता जो लंबे समय से संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय हैं और चुनावों के दौरान मैदान में डटे रहे। पार्टी सूत्रों का मानना है कि यह रणनीति संगठन की कार्यक्षमता बढ़ाएगी और आगामी चुनावों के लिए मजबूत नींव तैयार करेगी।
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