भारत में इंजीनियरिंग छात्रों को मिल रहा 57 लाख रुपये का धमाकेदार इंटर्नशिप स्टाइपेंड, जानिए क्या है काम

भारत की क्वांट ट्रेडिंग फर्म 'ग्रेविटॉन रिसर्च कैपिटल' ने इंजीनियरिंग छात्रों को 2 महीने की इंटर्नशिप के लिए 57 लाख रुपये का बंपर स्टाइपेंड ऑफर किया है।

Aug 05, 2026 - 19:07
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भारत में इंजीनियरिंग छात्रों को मिल रहा 57 लाख रुपये का धमाकेदार इंटर्नशिप स्टाइपेंड, जानिए क्या है काम

नौकरी की शुरुआत से ठीक पहले अगर किसी युवा को केवल दो महीने की समर इंटर्नशिप के बदले में 57 लाख रुपये का भारी-भरकम ऑफर मिले, तो यह किसी को भी बुरी तरह चौंका सकता है। लेकिन भारत की एक दिग्गज ट्रेडिंग कंपनी ने इस असंभव लगने वाले आंकड़े को पूरी तरह हकीकत में बदल कर रख दिया है। ‘ग्रेविटॉन रिसर्च कैपिटल’ नाम की एक प्रमुख क्वांटिटेटिव ट्रेडिंग फर्म ने देश के इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों के लिए यह रिकॉर्ड तोड़ और बंपर इंटर्नशिप स्टाइपेंड पेश किया है।

यदि इस पूरी रकम को हर महीने के औसत के हिसाब से देखा जाए, तो यह करीब 28.5 लाख रुपये महीना बैठती है। यह भारत के कॉर्पोरेट इतिहास में अब तक दिए जाने वाले सबसे महंगे और आकर्षक इंटर्नशिप प्रोग्राम्स में से एक माना जा रहा है। कंपनी की इस विशाल पेशकश का मुख्य मकसद देश के सबसे तेज-तर्रार और होनहार गणितज्ञों, कंप्यूटर प्रोग्रामर्स तथा रिसर्चर्स को अपनी टीम के साथ जोड़ना है। दरअसल, वर्तमान समय में भारत की क्वांट ट्रेडिंग इंडस्ट्री बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है, और बेहतरीन टैलेंट को अपनी तरफ खींचने के लिए इन कंपनियों के बीच कड़ी होड़ मची हुई है, जिसमें अब कई बड़ी ग्लोबल टेक कंपनियां और विदेशी इन्वेस्टमेंट बैंक भी शामिल हो चुके हैं।

💻 एडवांस्ड सॉफ्टवेयर तैयार करने और स्पीड का है पूरा खेल

इतनी बड़ी और चौंकाने वाली रकम चुकाने के पीछे कंपनी की तकनीकी जरूरतें भी बेहद खास और उच्च स्तर की हैं। सामने आई जानकारी के अनुसार, इस विशेष इंटर्नशिप के लिए चुने जाने वाले छात्रों को ग्रेविटॉन के अनुभवी क्वांट रिसर्चर्स, ट्रेडर्स और सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के साथ सीधे तौर पर काम करने का मौका मिलेगा।

इन इंटर्न्स का मुख्य दायित्व ऐसे अत्यंत मजबूत सॉफ्टवेयर और सिस्टम तैयार करना होगा जो लाइव शेयर बाजार के विशाल डेटा को पलक झपकते ही यानी माइक्रोसेकंड में पढ़ सकें। शेयर बाजार के इस हाई-टेक खेल में एक मिलीसेकंड की छोटी सी देरी भी निवेशकों या कंपनियों को करोड़ों रुपये का बड़ा नुकसान करा सकती है। यही वजह है कि सिस्टम की स्पीड, उसकी कार्यक्षमता और उसकी विश्वसनीयता सबसे ज्यादा मायने रखती है। कंपनी यह साफ कर चुकी है कि इंटर्नशिप के दौरान जो छात्र अपनी काबिलियत का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करेंगे, उन्हें भविष्य में रिसर्च और इंजीनियरिंग के पदों पर शानदार पैकेज पर स्थायी नौकरी भी दी जा सकती है। आज के दौर में ये क्वांट ट्रेडिंग कंपनियां दुनिया की बड़ी-बड़ी टेक जायंट कंपनियों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टार्टअप्स और वैश्विक हेज फंड्स को कड़ी टक्कर दे रही हैं, जिनकी पैनी नजर हमेशा गणित, सांख्यिकी और कंप्यूटर साइंस में महारत रखने वाले युवाओं पर रहती है।

📈 जानिए असल में क्या काम करती है यह ट्रेडिंग कंपनी?

शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले पारंपरिक और आम निवेशकों ने शायद 'ग्रेविटॉन' का नाम पहले कभी न सुना हो, लेकिन वित्तीय बाजार के अंदरूनी जानकारों के बीच यह एक बहुत बड़ा और रसूखदार नाम है।

आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) के पूर्व छात्र रह चुके अंकित गुप्ता और निशिल गुप्ता ने साल 2014 में इस कंपनी की नींव रखी थी। यह कंपनी आम जनता या खुदरा निवेशकों का पैसा बाजार में नहीं लगाती, बल्कि अपने खुद के फंड को शेयर बाजार, डेरिवेटिव्स और करेंसी मार्केट में निवेश करती है। इसके लिए वे बेहद जटिल गणितीय फॉर्मूलों, एडवांस सांख्यिकी (Statistics) और पूरी तरह ऑटोमेटेड एल्गोरिदम का इस्तेमाल करते हैं। ये हाई-टेक कंप्यूटर सिस्टम बाजार में कीमतों के मामूली से मामूली अंतर को तुरंत भांप लेते हैं और पलक झपकते ही सौदे पूरे कर लेते हैं।

यदि साल 2025 के एनएसई (NSE) बल्क डील के आंकड़ों पर नजर डाली जाए, तो ग्रेविटॉन ने अकेले करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये के 1,900 से अधिक बड़े सौदे किए थे, जो कुल बल्क डील्स का 10 प्रतिशत से भी ज्यादा हिस्सा है। वास्तव में इनके रोजाना के कुल सौदों की संख्या इससे भी कहीं अधिक बड़ी है। आज यह कंपनी केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि न्यूयॉर्क, लंदन, सिंगापुर, टोक्यो और हांगकांग जैसे दुनिया के सबसे बड़े वित्तीय केंद्रों में अपना कारोबार फैला चुकी है। भारत में इसका सीधा मुकाबला अल्फाग्रेप, क्वाडआई और वैश्विक स्तर पर जेन स्ट्रीट व सिटाडेल जैसी दिग्गज फर्मों से है।

💸 आम निवेशकों के भारी नुकसान के बीच इन कंपनियों का अकूत मुनाफा

इन हाई-टेक और क्वांट कंपनियों के काम करने का तरीका और मुनाफा कमाने की रफ्तार आम निवेशकों से बिल्कुल अलग और कई गुना तेज होती है। जहाँ एक तरफ ये कंपनियां अपनी अत्याधुनिक तकनीक के दम पर भारी-भरकम मुनाफा कमा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ देश के आम और छोटे निवेशक लगातार घाटे के दौर से गुजर रहे हैं।

हाल ही में बाजार नियामक सेबी (SEBI) की एक ताजा स्टडी में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया था कि वित्त वर्ष 2025 के दौरान 91 प्रतिशत आम निवेशकों ने डेरिवेटिव्स (फ्यूचर्स और ऑप्शंस) ट्रेडिंग में अपना गाढ़ा पैसा गंवा दिया है। इन छोटे निवेशकों का कुल शुद्ध नुकसान लगभग 1.06 लाख करोड़ रुपये तक आंका गया था।

इस पूरी इंडस्ट्री के कामकाज के तौर-तरीकों पर तब और अधिक सवाल उठे जब सेबी ने अमेरिका की एक बड़ी क्वांट फर्म ‘जेन स्ट्रीट’ पर कड़ी विधिक कार्रवाई की। सेबी का यह गंभीर आरोप था कि जेन स्ट्रीट ने एक्सपायरी के दिन बैंक निफ्टी के शेयरों में कथित हेरफेर करके 4,843.57 करोड़ रुपये का गैरकानूनी मुनाफा कमाया है। हालांकि, जेन स्ट्रीट कंपनी ने इन सभी आरोपों से साफ इनकार किया है और उसने विवादित रकम को एक एस्क्रो अकाउंट में जमा कर दिया है, जिसके चलते यह कानूनी मामला अभी भी अदालत और ट्रिब्यूनल में चल रहा है।

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