छात्राओं का टॉयलेट इस्तेमाल करने पर शासकीय स्कूल के प्राचार्य पर गिरी गाज, कमिश्नर ने किया सस्पेंड
छतरपुर जिले में छात्राओं का टॉयलेट इस्तेमाल करने के आरोप में शासकीय स्कूल के प्राचार्य को निलंबित कर दिया गया है। गुना से भी ऐसा ही मामला सामने आया है।
छतरपुर: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से एक बेहद शर्मनाक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक शासकीय स्कूल के प्राचार्य द्वारा छात्राओं के टॉयलेट का इस्तेमाल करने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। कलेक्टर के विस्तृत जाँच प्रतिवेदन के आधार पर सागर कमिश्नर ने शुक्रवार को यह सख्त कार्रवाई की है। यह पूरा मामला ईशानगर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का है, जहाँ छात्राओं ने जिला मुख्यालय पर आयोजित जनसुनवाई में सीधे कलेक्टर से शिकायत की थी कि स्कूल के प्राचार्य महिला शौचालय का उपयोग करते हैं और जब उन्हें ऐसा करने से रोका जाता है, तो वे छात्राओं और स्टाफ को तरह-तरह की धमकियाँ देते हैं।
📋 महिलाओं का टॉयलेट इस्तेमाल करने के गंभीर आरोप पर कार्रवाई
ईशानगर के शासकीय सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य बसन्तलाल प्रजापति को स्कूल में छात्राओं के टॉयलेट का उपयोग करने के गंभीर आरोपों के चलते तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। यह प्रशासनिक कार्रवाई सागर संभाग के कमिश्नर अनिल सुचारी द्वारा छतरपुर कलेक्टर के जाँच प्रतिवेदन के आधार पर की गई है।
सागर संभाग के कमिश्नर कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार, प्राचार्य बसन्तलाल प्रजापति का यह कृत्य उनके शासकीय दायित्वों के निर्वहन में घोर स्वेच्छाचारिता, अनुशासनहीनता और उनके पद के दुरुपयोग का स्पष्ट प्रतीक है। यह कृत्य मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 के उपनियम (I)(II)(III) का सीधा उल्लंघन है। इसी के तहत म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 09 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
🗣️ छात्राओं ने जनसुनवाई में पहुँचकर की थी कलेक्टर से शिकायत
ईशानगर स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की पीड़ित छात्राओं ने बीते जुलाई माह में छतरपुर कलेक्टर के समक्ष जनसुनवाई में पहुँचकर एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। छात्राओं ने अपने आवेदन में स्पष्ट रूप से लिखा था कि विद्यालय परिसर में पुरुषों के लिए अलग से शौचालय उपलब्ध होने के बावजूद स्कूल के प्राचार्य बसन्तलाल प्रजापति जानबूझकर महिलाओं के टॉयलेट का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा स्कूल की महिला शिक्षिकाओं और अन्य स्टाफ द्वारा भी प्राचार्य के खिलाफ कई अन्य गंभीर शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। मना करने पर वे सभी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे।
🔍 कलेक्टर ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कराई थी उच्चस्तरीय जाँच
जनसुनवाई में आई इस संवेदनशील शिकायत को पूरी गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर मृणाल मीणा ने तुरंत इस पूरे मामले की विस्तृत जाँच के आदेश दिए थे। जाँच में आरोप सही पाए जाने के बाद कलेक्टर ने सागर कमिश्नर को निलंबन के लिए औपचारिक पत्र भेजा था। यह पत्र संयुक्त संचालक लोक शिक्षण, सागर संभाग द्वारा 15 जुलाई 2026 को प्राचार्य बसन्तलाल प्रजापति के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों और जाँच निष्कर्षों के आधार पर आगे बढ़ाया गया था।
📑 जाँच समिति की रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं हुईं सिद्ध
कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी छतरपुर द्वारा एक विशेष जाँच समिति का गठन किया गया था। इस समिति की रिपोर्ट में प्राचार्य के खिलाफ कई गंभीर अनियमितताएँ और आरोप पूरी तरह सिद्ध पाए गए थे। रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि विद्यालय में पुरुष शौचालय उपलब्ध होने के बावजूद प्राचार्य द्वारा बालिकाओं के टॉयलेट का उपयोग किया जाता था। इसके अतिरिक्त, महिला शिक्षिकाओं और अन्य कर्मचारियों का मानसिक उत्पीड़न करने, उनका वेतन रोकने और शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं देने जैसी कई अन्य शिकायतें भी सही पाई गईं।
🏛️ गुना के शासकीय पीजी कॉलेज से भी सामने आया ऐसा ही मामला
मध्य प्रदेश के गुना जिले के शासकीय पीजी कॉलेज से भी एक ऐसा ही मिलता-जुलता गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ लेडीज टॉयलेट से बाहर निकलते हुए एक युवक का वीडियो तेजी से वायरल हो गया, जिसके सामने आने के बाद कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने जमकर हंगामा किया और जोरदार प्रदर्शन किया। यह वीडियो 6 अगस्त को सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हुआ था। इसके बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने शासकीय विधि महाविद्यालय में जोरदार प्रदर्शन करते हुए इसे अत्यंत गंभीर विषय बताया और महाविद्यालय प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपकर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच और दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई की माँग की।
📢 एबीवीपी ने अतिथि ग्रंथालय कर्मी को तत्काल निलंबित करने की माँग की
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक अंकित शर्मा ने आरोप लगाते हुए कहा कि वीडियो में जो शख्स नजर आ रहा है, वह गुना के पीजी कॉलेज में पदस्थ अतिथि ग्रंथालय कर्मी डॉ. मोहम्मद शाकिर है। यदि उपलब्ध वीडियो और तकनीकी जाँच में सामने आने वाले तमाम साक्ष्य सही साबित होते हैं, तो संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध कड़ी से कड़ी अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। एबीवीपी ने यह भी माँग की है कि जब तक जाँच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उस अतिथि ग्रंथालय कर्मी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।
उन्होंने आगे कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में पढ़ने वाली छात्राओं की गरिमा, उनकी निजता और उनकी सुरक्षा हमेशा से सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। महाविद्यालय परिसर के भीतर छात्राओं की सुरक्षा के लिए पुख्ता और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की निंदनीय घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है, तो एबीवीपी ने कॉलेज में तालाबंदी और उग्र आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है।
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